Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पॉश इलाके की कोठी में 'गंदा धंधा'! पुलिस की रेड में संचालिका और ग्राहक रंगे हाथों गिरफ्तार; हिरासत म... 15 साल का इंतजार और अब 'इंकलाब'! बैगा आदिवासियों के सब्र का बांध टूटा; अपनी ही जमीन के पट्टे के लिए ... सतना में जल संकट पर कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा 'एक्शन'! अब टैंकरों से घर-घर पहुँचेगा पानी; मंत्री ने अ... छतरपुर की बेटियों का दिल्ली में डंका! 3 महिला सरपंचों ने बदल दी गांव की तस्वीर; अब केंद्र सरकार के स... Chhatarpur LPG Raid: छतरपुर में अवैध गैस भंडारण पर बड़ी कार्रवाई, एक घर से 21 रसोई गैस सिलेंडर जब्त;... Jiwaji University Seniority List: जीवाजी यूनिवर्सिटी की वरिष्ठता सूची में बड़ी लापरवाही, मृतकों और स... भोपाल में फिल्मी स्टाइल में लूट! बीच सड़क प्रॉपर्टी डीलर की कार रोकी, चाकू अड़ाकर ₹55 लाख से भरा बैग... गैस संकट का साइड इफेक्ट! इंदौर की शादियों में अब लकड़ी-कंडे पर बनेगा खाना; प्रशासन ने कमर्शियल सिलें... Health System Failure: रास्ते में खराब हुई एंबुलेंस, घंटों धूप में पड़ा रहा किडनी का मरीज; सरकारी दा... Maihar Bus Fire: मैहर में धू-धू कर जली स्लीपर बस, यात्रियों ने कूदकर बचाई जान; देखें हादसे का लाइव व...

सभापति के निर्णय का सम्मान होना चाहिए: धनखड़

राज्यसभा में विपक्ष के नोटिसों की अस्वीकार करने पर सफाई दी

  • नियम 267 का हवाला दिया गया है

  • कुल 18 नोटिसों को नामंजूर किया है

  • संभल और मणिपुर की चर्चा से बचाव

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि नियम 267 पर सभापति के निर्णय का सम्मान होना चाहिए और इसे मतभेद का कारण नहीं बनाना चाहिए। सभापति ने बुधवार को सदन में नियम 267 के अंतर्गत विपक्षी दलों के सदस्यों के 18 नोटिसों को अस्वीकार करते हुए कहा कि नियम 267 के अंतर्गत सभापति का निर्णय अंतिम होता है और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पिछले 30 वर्ष में नियम 267 के संदर्भ में सदन ने हर बार सामूहिक दृष्टिकोण का प्रदर्शन किया है। ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए और चर्चा, संवाद, विमर्श और नियमों के पालन के माध्यम से उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। श्री धनखड़ ने कहा कि यह सदन वरिष्ठ जनों का सदन है और उच्च सदन है, राज्यों की परिषद है।

उन्होंने कहा कि सदन की उन परंपराओं का पालन करना चाहिए जो स्थापित हो चुकी हैं। सभापति के निर्णय का सम्मान होना चाहिए और इससे मतभेद का कारण नहीं बनाना चाहिये।

सदन में आज दिल्ली में कानून व्यवस्था की स्थिति, उत्तर प्रदेश के संभल और मणिपुर में हिंसा तथा अडाणी समूह की कथित अनियमिताओं की जांच कराने के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित करने पर चर्चा कराने की मांग करते हुए 18 नोटिस दिये गये थे। ये नोटिस आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला और नासिर हुसैन तथा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जॉन ब्रिटास और समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव समेत 18 सदस्यों ने दिये हैं।

सभापति ने कहा कि विभिन्न प्रावधानों और परिस्थितियों में इन नोटिसों को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। इन सभी मुद्दों को नियमों के अनुसार उठाने के लिए अवसर मिलेगा। अन्य नियमों में प्रावधान है कि इन मुद्दों को किसी न किसी रूप में प्रस्तावों के माध्यम से उठाया जा सकता है। इसलिए इन नोटिसों को अस्वीकार किया जा रहा है।

श्री धनखड़ ने कहा कि नियम 267 के संदर्भ में सदन की यात्रा को देखा जाना चाहिए। पिछले 30 वर्षों में, चाहे किसी भी राजनीतिक दल की सरकार रही हो, इस नियम का उपयोग यदा-कदा हुआ ही है। इसके उपयोग पर हर बार की पृष्ठभूमि में एक सामूहिक दृष्टिकोण सभी दलों के बीच संवाद और सभी पहलुओं पर विचार होता रहा है।

श्री धनखड़ ने कहा, ‘‘ मैं इस सदन के सदस्यों से अपील करता हूं कि इस ऐतिहासिक दिन पर जो संविधान अंगीकरण के शताब्दी वर्ष के चौथे चरण का पहला दिन है, हम उत्पादकता का स्तर बढ़ायें। हम एक ऐसा माहौल बनाएं जो चर्चा, संवाद, विमर्श और नियमों के पालन के माध्यम से उदाहरण प्रस्तुत करे।