Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Giridih News: सड़क हादसे में नवविवाहिता का उजड़ा सुहाग, पति की दर्दनाक मौत से मातम में बदली खुशियां JMM News: झामुमो की नीतीश-नायडू से अपील- 'मोदी सरकार से लें समर्थन वापस', नारी शक्ति वंदन एक्ट को बत... Palamu Crime News: चैनपुर में आपसी विवाद में फायरिंग, ट्यूशन से लौट रहे नाबालिग छात्र को लगी गोली Bokaro News: बोकारो में श्रद्धा और उल्लास से मन रहा 'भगता पर्व', जानें इस खास त्योहार की पूजा विधि औ... Jharkhand News: ग्रामीण विकास विभाग के कर्मी होंगे हाईटेक, AI तकनीक से लैस करेगी सरकार- मंत्री दीपिक... Jharkhand Cabinet Decisions: हेमंत सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माण होंगे वैध; D... CBSE 10th Result Jharkhand Topper: डीपीएस रांची की प्रण्या प्रिया बनीं स्टेट टॉपर, हासिल किए 99.6% अ... CG Cabinet Decisions: छत्तीसगढ़ में जमीन रजिस्ट्री पर बड़ी राहत, 50% स्टाम्प शुल्क छूट समेत साय कैबि... Khairagarh News: उदयपुर में ATM उखाड़ने की कोशिश नाकाम, पुलिस ने 24 घंटे में शातिर चोर को किया गिरफ्... Jashpur Crime News: महिला अपराध और नशा तस्करों पर जशपुर पुलिस का 'डबल एक्शन', कई आरोपी दबोचे गए

कभी जो बादल बरसे .. .. ..

 

कभी जो बादल बरसे सुनकर अलग अलग रिएक्शन आते हैं। जहां बाढ़ आयी है वहां के लोग अभी बादल बरसते देखना नहीं चाहते। बिहार के कई इलाके हैं, जहां लोग बादल बरसने को तरस रहे हैं। इसके अलावा भी पॉलिटिकल बादलों की मांग अभी चुनावी मौसम में तेज हो गयी है। सभी की इच्छा है कि राजनीतिक मॉनसून का सारा बादल सिर्फ उनके खेत में ही बरस जाए पर इंडियन मैंगो मैन बहुत निर्दयी है। वह कुछ कहता नहीं है चुपचाप मतदान केंद्र तक जाकर अपना फैसला सुना आता है।

अभी भारतीय राजनीति में कुछ ऐसा ही माहौल चल रहा है। अभी राजनीतिक मॉनसून के बादल कश्मीर और हरियाणा के आसमान पर मंडरा रहे हैं, कहां और कितना बरसेंगे, यह कह देना कठिन भविष्यवाणी है। पिछली बार के लोकसभा चुनाव के एक्जिट पोल का जो हाल हुआ है और वह एक्जिट पोल करने वालों का जो हाल हुआ है, उसे देखकर तो यही लगता है कि लोग दोबारा इस किस्म का दांव लगाने से बचेंगे और खुद को गालियों की बारिश से भी बचाना चाहेंगे। एक भाई साहब को तो इतनी गालियां पड़ी कि टीवी चैनल में बैठकर साहब रोने लग गये थे।

कश्मीर में कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के चुनावी तालमेल को दो तरफा रिएक्शन दिख रहा है। एक तरफ भाजपा कोस रही है तो दूसरी तरफ पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती नाराज है। दोनों को लगता है कि इस गंठजोड़ की वजह से उनकी दुकानदारी प्रभावित होने वाली है। धारा 370 की चर्चा से भी माहौल बदला हुआ है।

राहुल गांधी कह रहे हैं कि पूर्व स्थिति बहाल करेंगे तो केंद्रीय गृह मंत्री को कहना पड़ा रहा है कि अब स्थिति में बदलाव कोई नहीं कर सकता। कुल मिलाकर सबकी आंखें आसमान पर टिकी है, जहां चुनावी मॉनसून के बादल नजर आ रहे हैं। यह इसलिए भी है क्योंकि इसके बाद महाराष्ट्र और झारखंड का भी नंबर आने वाला है। इसी बात पर एक फिल्मी गीत याद आने लगा है।

फिल्म जैकपॉट के इस गीत को लिखा था तुराज और अजीम शिराजी ने, उसे संगीत में ढाला था शारीब ने और इस गीत को स्वर दिया था प्रसिद्ध गायक अरिजीत सिंह ने। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

कभी जो बादल बरसे मैं देखूँ तुझे आँखें भर के
तू लगे मुझे पहली बारिश की दुआ
तेरे पहलूँ में रह लूँ, मैं खुदको पागल कह लूँ
तू ग़म दे या खुशियाँ सह लूँ साथियाँ
कोई नहीं तेरे सिवा मेरा यहाँ मंज़िलें हैं मेरी तो सब यहाँ
मिटा दे सभी आजा फ़ासले मैं चाहूँ मुझे मुझसे बाँट ले
ज़रा सा मुझमें तू झाँक ले, मैं हूँ क्या
ओ ओ ओ या या हा सुनलिया या या या
सुनलिया या या या पहले कभी ना तूने मुझे ग़म दिया
फिर मुझे क्यूँ तनहा कर दिया?
गुज़ारे थे जो लमहें प्यार के हमेशा तुझे अपना मान के
तो फिर तूने बदली क्यूँ अदा? ये क्यूँ किया? (ये क्यूँ किया)
हो, हो, हो, हो
कभी जो बादल बरसे मैं देखूँ तुझे आँखें भर के
तू लगे मुझे पहली बारिश की दुआ
तेरे पहलूँ में रह लूँ, मैं खुदको पागल कह लूँ
तू ग़म दे या खुशियाँ सह लूँ साथियाँ
हरियाणा में भी पहलवानों ने चुनावी दंगल में भाजपा की परेशानी बढ़ा दी। दिल्ली के जंतर मंतर पर अपमान की आग कुछ ऐसी लगी को पेरिस ओलंपिक में नाम का डंका बजा दिया। अब वापस लौटी तो कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में कूद पड़ी। दूसरे पहलवान बजरंग पुनिया को कांग्रेस ने किसान प्रकोष्ठ के साथ जोड़ दिया। यह दोनों ही फैसले भाजपा के चुनावी भविष्य से मॉनसून के बादल झटक सकते हैं।

महाराष्ट्र में सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक शिवाजी महाराज की प्रतिमा कुछ ऐसे गिर गयी तो शिंदे सरकार उसके बोझ तले दबी जा रही है। ऊपर से अजीत पवार कब साथ छोड़ देंगे, इसका अलग टेंशन बना हुआ है। झारखंड में फिलहाल भाजपा की टेंशन आदिवासी कार्ड है। उन्हें पता है कि यह वोट बैंक अचानक से खिसक गया है और उसके बिना सत्ता तक पहुंचना कठिन है। सो जोड़ तोड़ का खेल जारी है और नतीजा क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी। वैसे यह तो मानना पड़ेगा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी हेमंत सोरेन सरकार की टेंशन बढ़ा दी है और लगता है कि राज्य में प्रभारी डीजीपी बनाने का फैसला अंततः उलट दिया जाएगा।

अब दिल्ली भी हो आते हैं तो ऐसा लगता है कि हर तरीके से कोशिश कर लेने के बाद भी अंततः भाजपा वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जेल में नहीं रख पायेंगे क्योंकि बार बार निर्देश के बाद भी ठोस सबूत कुछ नहीं दिखा पायी हैं केंद्रीय एजेंसियां। चिंता इस बात की है कि जब कभी सरकार बदलेगी तो तेरा क्या होगा कालिया।