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जिसके खिलाफ जांच वही जांच अधिकारी कैसे

हाईकोर्ट में फंसेगा दानिएल दानिश की याचिका का मामला

  • रिटायर्ड एसपी की बातचीत का रिकार्ड

  • रांची पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दिया है

  • अदालत में कई किस्म की चर्चा जारी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः झारखंड उच्च न्यायालय में शीघ्र ही दानिएल दानिश की उस याचिका की सुनवाई होगी, जिसे रांची पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट देकर खत्म कर दिया है। रांची पुलिस की यह रिपोर्ट मामले में बतौर एनेक्चर लगी हुई है। इसका कानूनी पहलू इस बात को लेकर है कि जिसके खिलाफ जांच हो रही है, वही जांच अधिकारी कैसे हो सकता है।

उच्च न्यायालय के रिकार्ड के मुताबिक गत छह जुलाई 2023 को अदालत ने मामले की सुनवाई की थी। इसमें याचिकादाता की तरफ से अधिवक्ता राजीव कुमार ने यह दलील दी थी कि याचिकादाता पर एक पुलिस अधिकारी द्वारा नाजायज दबाव डाला गया था। दस्तावेज के मुताबिक दो पक्षों की बातचीत की एक सीडी भी दाखिल की गयी है।

इसमें याचिकादाता के साथ रिटायर्ड एसपी मोहम्मद निहाल की बातचीत का विवरण है। रिकार्ड के मुताबिक एसपी निहाल यह दावा कर रहे हैं कि उन्हें अनुराग गुप्ता आईपीएस द्वारा भेजा गया है। वह याचिकादाता को इस बात के लिए चेतावनी दे रहे हैं कि अनुराग गुप्ता एक अत्यंत ताकतवर पुलिस अधिकारी हैं। इसलिए उनके साथ विवाद करना दानिश के हक में ठीक नहीं होगा।

उसे इस बात का सुझाव दिया जा रहा है कि वह या तो केस वापस ले ले अथवा वकील राजीव कुमार से अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल करे। सुनवाई के क्रम में यह सीडी प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता दीपांकन राय को भी उपलब्ध करायी गयी थी। जिन्होंने इसके होने को स्वीकार किया था।

इस बीच रांची पुलिस ने अपनी जांच में आरोपों के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं पाने का दावा कर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। यानी पुलिस की तरफ से यह मामला रफा दफा कर दिया गया। अब अदालयत में याचिका लंबित होने की वजह से रांची पुलिस के क्लोजर रिपोर्ट को भी उसमें संलग्न किया गया है।

अदालती जानकार मानते हैं कि दरअसल इस मामले में रांची पुलिस को भी इस सवाल का उत्तर देना पड़ सकता  है कि जिस अफसर के खिलाफ यह सारी जांच थी, वही जांच अधिकारी के तौर पर इसका निर्धारण कैसे कर सकता है। दरअसल वर्तमान में अनुराग गुप्ता झारखंड पुलिस के दो महत्वपूर्ण विभागों के शीर्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

चर्चा है कि वह इसी क्रम में डीजीपी पद पर अपनी दावेदारी के लिए पक्ष और विपक्ष दोनों खेमों के नेताओं से लगातार बेहतर संपर्क बनाकर चल रहे हैं। लिहाजा उच्च न्यायालय में यह मामला भी नये सिरे से गुल खिला सकता है। अदालत के लोग भी राज्य सरकार में उथल पुथल के शांत होने के बाद अगली फेरबदल की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हाईकोर्ट में भी चर्चा है कि शीघ्र ही चुनाव को देखते हुए हेमंत सोरेन की सरकार आईएएस और आईपीएस स्तर पर अधिकारियों का तबादला करने जा रही है।