Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Giridih News: सड़क हादसे में नवविवाहिता का उजड़ा सुहाग, पति की दर्दनाक मौत से मातम में बदली खुशियां JMM News: झामुमो की नीतीश-नायडू से अपील- 'मोदी सरकार से लें समर्थन वापस', नारी शक्ति वंदन एक्ट को बत... Palamu Crime News: चैनपुर में आपसी विवाद में फायरिंग, ट्यूशन से लौट रहे नाबालिग छात्र को लगी गोली Bokaro News: बोकारो में श्रद्धा और उल्लास से मन रहा 'भगता पर्व', जानें इस खास त्योहार की पूजा विधि औ... Jharkhand News: ग्रामीण विकास विभाग के कर्मी होंगे हाईटेक, AI तकनीक से लैस करेगी सरकार- मंत्री दीपिक... Jharkhand Cabinet Decisions: हेमंत सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माण होंगे वैध; D... CBSE 10th Result Jharkhand Topper: डीपीएस रांची की प्रण्या प्रिया बनीं स्टेट टॉपर, हासिल किए 99.6% अ... CG Cabinet Decisions: छत्तीसगढ़ में जमीन रजिस्ट्री पर बड़ी राहत, 50% स्टाम्प शुल्क छूट समेत साय कैबि... Khairagarh News: उदयपुर में ATM उखाड़ने की कोशिश नाकाम, पुलिस ने 24 घंटे में शातिर चोर को किया गिरफ्... Jashpur Crime News: महिला अपराध और नशा तस्करों पर जशपुर पुलिस का 'डबल एक्शन', कई आरोपी दबोचे गए

हेमंत सरकार को अंदर से नुकसान कौन पहुंचा रहा है

अवमानना के मामले में उलझाने की चाल


  • चंद्रचूड़ की अदालत का है फैसला

  • तय है दो साल का होगा कार्यकाल

  • भाजपा की मदद की साजिश में कौन


राष्ट्रीय खबर

रांचीः जमानत पर बाहर आने के बाद दोबारा मुख्यमंत्री बनने से हेमंत सोरेन का कौन करीबी परेशान और नाराज है। इस बात का खुलासा अंदरखाना से ही संभव है पर प्रोजेक्ट भवन में चल रही सूचनाओं के मुताबिक यदि ऐसा होता है तो राज्य सरकार फिर से सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के मामले में उलझ जाएगी। राज्य सरकार के काम काज और अदालतों के दांव पेंच को समझने वाले मानते हैं कि जमानत पर बाहर आने के बाद हेमंत सोरेन का किसी नये कानूनी विवाद में उलझना स्वाभाविक तौर पर उनके राजनीतिक सेहत के लिए अच्छा नहीं होगा।

दरअसल यह चर्चा कई दिनों से चल रही है कि सरकार शीघ्र बडे पैमाने पर आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का तबादला और पदस्थापन करने वाली है। सूत्रों की मानें तो अगले सप्ताह इस सोच को अंजाम दिया जाएगा। इसी क्रम में बार बार राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को बदलने की चर्चा भी जोर पकड़ती है।

जानकार मानते हैं कि ऐसा करना राज्य सरकार के हित में नहीं होगा क्योंकि ऐसे शीर्ष पदों की पदस्थापना के बारे में सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के मुताबिक याचिका संख्या 881 -2021 को निष्पादित करने वक्त कई स्पष्ट निर्देश दिये गये थे। यह याचिका केंद्र सरकार एवं अन्य के खिलाफ दायर की गयी थी। संविधान के आर्टिकल 32 का हवाला देते हुए शीर्ष अदालत ने याचिका को निष्पादित किया था।

इसी मामले में झारखंड का भी उल्लेख किया गया था। याचिका संख्या 310-1996 में झारखंड के डीजीपी के मामले का संदर्भ दिया गया था। जिसमें लोक सेवा आयोग की तरफ से वकील नरेश कौशिक ने अदालत को सरकारी सोच की जानकारी दी थी। आयोग के मुताबिक एक पैनल तैयार कर राज्य सरकार को गत 5 जनवरी 2023 को भेज दिया गया है।

प्रसिद्ध वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि सारी औपचारिकताएं 12 फरवरी 2023 तक पूरी कर ली जाएगी। इसी आदेश के पैरा चार में यह साफ साफ लिखा गया था कि अगर कोई गड़बड़ी हो तो अवमानना का मामला कभी भी उठाया जा सकता है। सूत्र के मुताबिक इस याचिका की सुनवाई वर्तमान मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति बी पारदीवाला की अदालत में हुई थी।

इसकी जानकारी प्रोजेक्ट भवन अथवा पुलिस मुख्यालय के वरीय अफसरों को है। इसके बाद भी यह जानकारी मिल रही है कि इस अदालती आदेश को दरकिनार करने का कोई तरीका खोजने के लिए एक पुलिस अधिकारी हाल के दिनों में दिल्ली का चक्कर लगा चुका है। लिहाजा एक पक्ष इसी तिकड़म के जरिए राज्य सरकार को फिर से उलझाकर भाजपा को फायदा पहुंचाने के जुगाड़ में व्यस्त है।