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दीपिका पांडेय सिंह ने लाह कारखाना का दौरा किया

पदभार ग्रहण करने के बाद लाह उत्पादन पर मंत्री की नजर

रांचीः दीपिका पांडेय सिंह, मंत्री, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखण्ड द्वारा झारखण्ड राज्य सहकारी लाह क्रय-विक्रय एवं आहरण संघ सीमित (झास्कोलैम्पफ) के लाह कारखाना, सिदरौल, नामकोम का भ्रमण किया गया एवं झास्कोलैम्पफ द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों यथा प्राथमिक लाह परिष्करण ईकाई, लैक सीलिंग स्टिक उत्पादन की जानकारी ली गयी। इस अवसर पर निबंधक, सहयोग समितियों, झारखण्ड, प्रबन्ध निदेशक, झास्कोलैम्पफ, कार्यपालक अभियन्ता, भवन निर्माण निगम, सहायक अभियन्ता, आईसीडीपी कोषांग एवं अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

भ्रमण के दौरान मंत्री को प्रबन्ध निदेशक, झास्कोलैम्पफ द्वारा बताया गया कि गत दो वर्षों में लगभग 2000 लाह कृषकों को वैज्ञानिक पद्धति से लाह की खेती एवं लाह मूल्य संवर्द्धन (प्राथमिक परिष्करण) का प्रशिक्षण प्रदान कराया गया। साथ ही लाह कृषकों को 90 प्रतिशत अनुदान पर लाह बीहन एवं लाह खेती में प्रयुक्त होनेवाले टूल-कीट्स उपलब्ध कराया जाता है। राज्य में निर्वाचन प्रयोजनार्थ लैक सीलिंग स्टिक की आपूर्ति 12 जिलों में की गयी।

उनके द्वारा यह भी बताया गया कि 312 लैम्पस, पैक्स, व्यापार मंडल एवं प्राथमिक लाह उत्पादक सहयोग समितियों, झास्कोलैम्पफ से सम्बद्ध है। समीक्षा के क्रम में यह भी बताया गया कि राज्य में मुख्यतः 9 जिलों यथा- रॉची, खूँटी, सिमडेगा, गुमला, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसांवा, लातेहार, पलामू एवं गढ़वा में कुसुम, बैर, पलास एवं सेमियालता वृक्षों पर लाह की खेती की जाती है। वर्तमान में बाजार दर न्यूनतम समर्थन मूल्य (कुसुमी लाह 275 रूपये प्रति किलोग्ाम, रंगीनी लाह 200 रूपये प्रति किलोग्गाम) से काफी ज्यादा होने के कारण लाह कृषकों से लाह का आहरण संभव नहीं हो पा रहा है।

इस क्रम में मंत्री द्वारा निदेश दिया गया कि राज्य एवं राज्य से बाहर लैक सीलिंग स्टिक की आपूर्ति हेतू कैबिनेट संलेख तैयार करें ताकि राज्य के लाह उत्पादक किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुँचाया जा सके। झास्कोलैम्पफ द्वारा संचालित लाह कारखाना एवं प्रशिक्षण गतिविधियों में भी सुधार लाने एवं लाह आधारित उत्पादों के विपणन हेतु क्रेता-विक्रेता सम्मेलन, संस्थागत विपणन हेतु कम्पनी / संस्थाओं के साथ एकरारनामा करने का निदेश दिया गया। साथ ही साथ लाह कारखाना, सिदरौल में स्कूल एवं कॉलेज के छात्रों को भ्रमण कराकर उन्हें लाह उत्पाद एवं उसके परिसंस्करण की जानकारी दी जाए। लाह कारखाना परिसर में हो रहे निर्माण कार्यों का भी निरीक्षण किया गया एवं जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूर्ण करने का निदेश दिया गया।