Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Parliament News: 'PM की सीट घेरी, चैंबर में चिल्लाए', विपक्ष के खिलाफ एकजुट हुईं BJP की महिला सांसद;... Ranchi Crime: रांची में वैलेंटाइन वीक पर खूनी खेल; शादीशुदा प्रेमी की हत्या कर प्राइवेट पार्ट काटा, ... Maharashtra Liquor Ban: महाराष्ट्र के इस गांव में शराबबंदी के लिए हुई वोटिंग, जानें महिलाओं ने बाजी ... Weather Update: दिल्ली में समय से पहले 'हीटवेव' का डर, 27 डिग्री पहुंचा पारा; यूपी-बिहार में कोहरे क... Raj Thackeray on Mohan Bhagwat: 'हिंदी थोपने वाली सरकार पर बोलें भागवत', भाषा विवाद पर राज ठाकरे का ... Khatu Shyam Mandir: खाटूश्याम मंदिर में SHO की गुंडागर्दी! युवक को कॉलर से खींचा, जमीन पर पटका; वीडि... Mathura Mass Suicide: मथुरा में सामूहिक आत्मघाती कदम, 5 सदस्यों की मौत से इलाके में दहशत, सुसाइड नोट... CM Yogi in Sitapur: 'बंट गए तो कटने के रास्ते खुल जाएंगे', सीतापुर में सीएम योगी ने दुश्मनों को लेकर... वित्त मंत्री अपना पिछला वादा भूल गयीः चिदांवरम शीर्ष अदालत में पश्चिम बंगाल एसआईआर मुद्दे पर सुनवाई

नीट पेपर लीक में सवालों के घेरे में भाजपा के फैसले

नीट परीक्षा पद्धति की विफलताओं के विरोध में देश के बड़े हिस्से में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। भ्रष्टाचार के वायरस ने सभी केंद्रीय नियंत्रित परीक्षाओं को संक्रमित कर दिया है। लोगों का गुस्सा देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था तक पहुंच गया है, जहां सरकार ने संसदीय नियम पुस्तिका के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की।

राज्यसभा में, नीट परीक्षा में खामियों पर चर्चा करने के लिए इस लेखक द्वारा दिए गए एक नोटिस सहित 22 नोटिसों को सभापति ने सरसरी तौर पर खारिज कर दिया। ऐसा तब हुआ जबकि लाखों छात्र और उनके परिवार नाराज है। पिछले कुछ वर्षों में, केंद्र सरकार के मंत्री नीट की प्रशंसा करते रहे हैं। इसके शीर्ष पर बैठे लोगों का पूर्व रिकार्ड संदेह पैदा करता है, जिन्हें बचाने की भरसक कोशिश हो रही है।

परीक्षा प्रणाली में विश्वास का टूटना पूरी प्रणाली में विश्वास के टूटने के बराबर है। प्रारंभिक इंकार के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को यह स्वीकार करना पड़ा कि पेपर लीक हुए थे। यह स्वीकारोक्ति भी भाजपा के दोहरे मानदंडों से मुक्त नहीं है। प्रधान ने कहा कि “नीट पेपर लीक से केवल सीमित संख्या में छात्र प्रभावित हुए हैं”, जबकि उन्होंने दोबारा परीक्षा की जोरदार मांग को खारिज कर दिया।

तब से पेपर लीक का पूरा गठजोड़ पता चला है और यह स्पष्ट है कि पेपर लीक और भ्रष्टाचार ने बड़ी संख्या में छात्रों को प्रभावित किया है। इतने सारे छात्रों को हुए नुकसान के बावजूद, मामले के शीर्ष पर बैठे किसी भी व्यक्ति पर मामला दर्ज नहीं किया गया या यहां तक ​​कि उसे तलब भी नहीं किया गया। यह पराजय कोई दुर्घटना नहीं है। यह परीक्षा की संरचना में ही अंतर्निहित थी। भाजपा द्वारा परिकल्पित नीट परीक्षा, शिक्षा के केंद्रीकरण और व्यावसायीकरण के प्रति उनके जुनून को पूरा करती है।

कई राज्यों द्वारा इसके संघ-विरोधी चरित्र के लिए कड़े विरोध के बावजूद छात्रों पर नीट थोपा गया। चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और दान प्रणाली को समाप्त करने के दोहरे उद्देश्य धराशायी हो गए। निजी कोचिंग उद्योग इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभार्थी बन गया, जिसने प्रभावी रूप से चिकित्सा शिक्षा को अमीरों और संपन्न लोगों का एक विशेष क्लब बना दिया। समय और संसाधनों की कमी के कारण गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र स्वाभाविक रूप से इस दौड़ में पीछे रह गए।

एनटीए को एक निजी, गैर-जिम्मेदार और गैर-जवाबदेह निकाय के रूप में लाखों छात्रों पर थोपा गया था। इसके अलावा, एनटीए के साथ स्थायी रूप से काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या आश्चर्यजनक रूप से कम 25 है। इस संगठन को 25 से अधिक केंद्रीय परीक्षाएं आयोजित करने के लिए जिम्मेदार बनाया जाना इस बात का प्रमाण है कि भाजपा देश के भविष्य को लेकर कितनी गंभीर है।

इन हजारों निजी विक्रेताओं में से हर एक के पास लोगों के प्रति किसी भी जवाबदेही के बिना पेपर लीक, ग्रेस मार्क्स देने और मूल्यांकन को प्रभावित करने में लिप्त होकर परीक्षा की अखंडता से समझौता करने की क्षमता है। संक्षेप में कहें तो भाजपा के केंद्रीकरण की होड़ और छात्रों तथा देश के शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए इसके विनाशकारी परिणामों के खिलाफ पर्याप्त सबूत पहले से ही मौजूद हैं।

भाजपा सरकार को शिक्षा और प्रवेश परीक्षाओं के लिए व्यापक और विकेंद्रीकृत मॉडल तैयार करने के लिए राज्य सरकारों सहित सभी हितधारकों के साथ गंभीर परामर्श करना चाहिए। लोगों ने चुनावों के माध्यम से उन्हें आकार में काट दिया है, लेकिन भाजपा ने जनादेश से कुछ भी सीखने से इनकार कर दिया है। इस बार, जवाब सड़कों से आएगा।

इंडिया गठबंधन प्रभावित लोगों की आवाज़ उठाएगा। एनटीए पूरी तरह से अपनी विश्वसनीयता खो चुका है और इसे तुरंत खत्म कर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, इन कदमों के पीछे के दिमागों को भी दोषी ठहराया जाना चाहिए। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट घोटाले के लिए “नैतिक जिम्मेदारी” का दावा किया है, लेकिन उनके कार्यालय की छवि उनके बयानों के कारण खराब हुई है।

शिक्षा मंत्रालय में लोगों का भरोसा बहाल करने और जांच में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से बचने के लिए धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा दे देना चाहिए। शिक्षा प्रणाली में सुधार की बहुत देर हो चुकी है। भाजपा की अक्षमताओं पर लगाम लगेगी, हम यह सुनिश्चित करेंगे। इस बात से अब कोई इंकार नहीं कर सकता कि इस किस्म की दुकानदारी के असली मकसद योग्यता को पीछे छोड़कर सिर्फ अमीरों की मदद करना है। यही आरोप तो नरेंद्र मोदी सरकार पर पहले राहुल गांधी और कांग्रेस तथा अब इंडिया गठबंधन के दूसरे सहयोगी भी लगा रहे हैं। भाजपा को बताना चाहिए कि इससे क्या वह देश की भावी पीढ़ी के साथ अन्याय कर रही है अथवा नहीं।