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हेमंत के खिलाफ जमीन का आरोप तो बनता नहीं

ईडी ने दूसरे मामलों को इसके साथ जोड़ने की कवायद की


  • सरकारी रिकार्ड आरोप को गलत बताते हैं

  • सीएनटी एक्ट का उल्लेख ईडी का कांटा

  • बहस में यह आरोप अंततः खारिज होगा


राष्ट्रीय खबर

रांचीः कथित भूमि घोटाला मामले में गिरफ्तार, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार (5 फरवरी) को भाजपा और ईडी को चुनौती दी कि अगर वे उन्हें रांची में 8.5 एकड़ जमीन का मालिक बताते हुए कोई रिकॉर्ड पेश कर सकें, तो वह राजनीति छोड़ देंगे और राज्य भी। इस चुनौती के पहले ईडी और भाजपा दोनों की तरफ से इस जमीन के मामले में हेमंत सोरेन पर लगातार आरोप लगाये जा रहे थे।

गिरफ्तारी के बाद विधानसभा में विश्वासमत प्रस्ताव पर बोलते हुए हेमंत ने कहा था, अगर हिम्मत है तो वो (भाजपा) कागज़ पटक के दिखायेगे कि 8.5 एकड़ की ज़मीन हेमन्त सोरेन के नाम पर है। अगर है तो मैं राजनीति से इस्तीफा दे दूंगा, राजनीति से संन्यास क्या, झारखंड ही छोड़ कर चले जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट में सोरेन की याचिका में जमीन के उक्त टुकड़े पर एक असंबंधित विवाद का हवाला दिया गया था, जिसे इसके असली मालिक को स्थापित करने के लिए हल किया गया था। याचिका के अनुसार, भूखंड पर राज कुमार पाहन और बुधन राम के बीच विवाद था। बड़गाई अंचल कार्यालय ने पिछले साल इसकी जांच की, और पाया कि भूमि झारखंड सरकार में निहित नहीं है और भूमि रिकॉर्ड में इसकी प्रविष्टि क्रम में नहीं पाई गई है।

इसके बाद मामला राजस्व अदालत में गया, जहां विशेष विनियमन अधिकारी मनीषा तिर्की की अदालत ने फैसला सुनाया कि बड़गाई अंचल कार्यालय द्वारा बनाए गए राजस्व रिकॉर्ड अधूरे पाए गए हैं।  टिर्की ने आदेश में कहा कि दोनों पक्षों में से एक पूरी सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुआ और बाद में यह पाया गया कि इस पक्ष बुधन राम ने धोखे से जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया था। इसलिए, यह आदेश दिया गया कि जमीन कानूनी मालिक राज कुमार पाहन को वापस कर दी जाए।

ईडी झारखंड में विभिन्न मामलों की जांच कर रहा था, जिसमें अवैध खनन, 2009 का मनरेगा घोटाला और रांची में सेना के एक भूखंड की कथित अवैध बिक्री और खरीद शामिल है। सेना की जमीन की जांच के दौरान बड़गाईं अंचल कार्यालय के तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद का नाम सामने आया था और कहा गया था कि वह हेमंत सोरेन से जुड़े थे।

ईडी ने दावा किया कि प्रसाद एक ऐसे सिंडिकेट का हिस्सा थे जो बलपूर्वक और साथ ही सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी करके अवैध रूप से संपत्ति हासिल करने में शामिल था। एजेंसी के अनुसार, प्रसाद कई मूल रजिस्टरों के संरक्षक थे – जिन्हें पंजी 2 के रूप में भी जाना जाता है – जिसमें भूमि रिकॉर्ड (विशेष रूप से स्वामित्व विवरण) को गलत ठहराया गया था।

जमीन का मामला साफ होने के बाद अब व्हाट्सएप चैट के जरिए तबादला के खेल का आरोप सामने आया है। इसके साथ ही दूसरे आरोप भी लगाये जा रहे हैं। लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि जमीन हड़पने का जो आरोप ईडी ने लगाया था वह कानूनी दस्तावेजों के मुताबिक शायद साबित नहीं हो पायेगा।