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अमित शाह भी खाली कुर्सी देख निराश

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः लाखों लोगों को इकट्ठा करने का लक्ष्य लेकर भाजपा धर्मतल्ला में उतरी थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसी उम्मीद में आये थे। लेकिन उस बैठक में शाही जोश नजर नहीं आया। अमित शाह आये, देखा, कहा लेकिन दिल नहीं जीत सके। वहीं, बैठक में आए भाजपा नेता से कार्यकर्ताओं-समर्थकों को वह उत्साह नहीं मिला जो वे चाहते थे।

शहर हो या गांव भाजपाइयों को निराश होकर घर लौटना पड़ा। केंद्रीय गृह मंत्री ने जो कहा, उसमें से बहुत कुछ सुना जा चुका है। अमित शाह ये सारी बातें पहले भी बंगाल में कई सभाओं में कह चुके हैं। नया केवल तीन तृणमूल नेताओं, पार्थ चट्टोपाध्याय, अनुब्रत मंडल, ज्योतिप्रिय मल्लिक का नाम है, जिन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ऐसे में उन्होंने कुछ हद तक चुनौती भरे लहजे में तृणमूल और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को संदेश दिया। लेकिन वह अपने भाषण से भाजपा समर्थकों मे जोश पैदा नहीं कर पाये। अनुमान है कि भीड़ की कम मौजूदगी की वजह से खुद अमित शाह भी निराश हुए थे।

केंद्रीय गृह मंत्री के कार्यक्रम में कहा गया था कि वह दोपहर 2:30 बजे तक मंच संभालेंगे। वह अपराह्न साढ़े तीन बजे मंच छोड़ देंगे। दरअसल, शाह उससे कम से कम 45 मिनट पहले मंच छोड़कर चले गए। उन्होंने भाषण थोड़ा अचानक खत्म कर दिया। राज्य भाजपा के एक सूत्र ने दावा किया कि शाह कम से कम आधे घंटे तक बोलेंगे। शाह ने 23 मिनट तक भाषण दिया।

लोगों ने सोचा कि ट्रैफिक जाम, जुलूस, सार्वजनिक समारोहों में पीड़ा अंतिम होगी। बुधवार को मध्य कोलकाता के कई स्कूलों में भी अघोषित छुट्टी घोषित कर दी गई। दरअसल, विक्टोरिया हाउस के सामने के हिस्से को छोड़कर धर्मतल्ला की शक्ल लगभग अन्य दिनों जैसी ही रही। शाह का भाषण शुरू होने से दस मिनट पहले भी, लेनिन स्क्वायर पर यातायात लगभग बिना किसी रुकावट के चल रहा था।

सभा में आए कई लोगों ने कहा कि वे शाह के भाषण में कुछ नया सुनने की उम्मीद कर रहे थे। राज्य के कई नेताओं और कार्यकर्ता समर्थकों को उम्मीद थी कि शाह कुछ संकेत देंगे कि क्या विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसियां ​​​​तृणमूल नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ आरोपों के मद्देनजर अधिक सक्रिय हो जाएंगी।

राज्य के कई भाजपा नेताओं ने कहा है, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री जितना कह सकते हैं, उन्होंने कहा है। एक नेता के शब्दों में क्या होगा और क्या नहीं होगा, वो सारी बातें सार्वजनिक सभा से कही जा सकती हैं। सिर्फ महुआ मोइत्रा का नाम लिए बिना कहा कि तृणमूल सांसद ने संसद को भी अपवित्र किया है।