Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
मध्य प्रदेश में 'ई-प्रवेश' प्रणाली ने बनाया रिकॉर्ड: डॉ. मोहन यादव के विजन से 4.89 लाख छात्रों ने लि... जबलपुर में महिला आरक्षक से पहचान छिपाकर दुष्कर्म और धर्मांतरण का दबाव, एसपी दफ्तर पहुंची पीड़िता “मेरा बेटा राह भर तड़पता रहा...”, मंडला में 108 एंबुलेंस की घोर लापरवाही से 21 साल के युवक की तड़पकर... उज्जैन बनेगी देश की पहली 'सर्प मित्र नगरी': 15 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक स्नेक पार्क, जानें खूबि... नेपाल में कांवड़ यात्रा से पहले झंडे को लेकर भड़की हिंसा: भारत सीमा से लगे 5 जिलों में कर्फ्यू, सरका... केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: अगले 5 सालों के लिए बढ़ी 'पीएम-किसान' योजना, ₹3.15 लाख करोड़ के बजट को म... भारत में गूगल ने लॉन्च किया Gemini Spark AI एजेंट! आपके बिना ऑनलाइन रहे भी करेगा सारे काम, जानें खास... सावन में करें श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ: दूर होंगे सभी कष्ट, जानें श्रीराम से जुड़ी कथा, सही स... अर्ली मेनोपॉज और हाई ब्लड प्रेशर का क्या है कनेक्शन? एक्सपर्ट से जानें एस्ट्रोजन हार्मोन का असर और ब... IB अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद, जानें किन पुख्ता सबूतों पर कोर्ट ने सु...

आयुष्मान कार्ड के गोरखधंधा से अच्छी कमाई

  • बेड पर लिटाकर मोबाइल से फोटो

  • मरीज को पता नहीं चलता कमाई का

  • अफसर भी इस बंदरबांट में हिस्सेदार

राष्ट्रीय खबर

रांचीः झारखंड में भी आयुष्मान कार्ड अवैध कमाई का अच्छा खासा माध्यम बन गया है। जैसे जैसे लोगों की इस कमाई की भनक मिल रही है, वे भी जहां तहां से पूंजी जुटाकर ऐसे अस्पताल या क्लीनिक खोल रहे हैं। इन प्रतिष्ठानों को आयुष्मान कार्ड के ईलाज से पंजीकृत कराने में थोड़ा बहुत भेंट चढ़ाने का दस्तूर सभी को पता है। अब तो हालत यह है कि जहां सामान्य सुविधाएं भी नहीं हैं, वहां आयुष्मान के रोगियों के ईलाज के नाम पर अवैध कमाई हो रही है।

मामले की जानकारी रखने वाले ने रांची के कई अपरिचित इलाकों में बने अस्पतालों का उल्लेख किया। इन अस्पतालों अथवा क्लीनिकों में मरीज के पहुंचते ही उसके स्वास्थ्य के बदले आयुष्मान कार्ड है अथवा नहीं, इसकी जानकारी ली जाती है। आयुष्मान कार्ड होने के बाद तुरंत ही एक के बाद एक जांच की प्रक्रिया प्रारंभ होती है।

सामान्य मरीज को बेहतर ईलाज का एहसास होता है। बाद में किसी मामूली ऑपरेशन के नाम पर बिल बनता है। चूंकि मरीज को इसका पैसा नहीं देना पड़ता, इसलिए वह इस बारे में ज्यादा खोज खबर नहीं लेता। उसकी अपनी परेशानी ठीक होने पर ही वह संतुष्ट हो जाता है।

एक अन्य मामले की बारे में पता चला कि मरीजों के बैठने के स्थान पर ही दो बेड लगाकर आयुष्मान कार्ड के नाम पर गोरखधंधा हो रहा है। मामले को देखने वाले ने बताया कि इन बेडों पर मरीजों को लिटाकर उन्हें पट्टियां लगायी जाती है और मोबाइल से ही उनके चित्र लिये जाते हैं। ऐसे मरीजों के नाम पर जो बिल बनता है, वह अब औसतन दो लाख रुपये प्रति माह तक पहुंच गया है।

इस मामले में जानकारी हासिल करने के क्रम में यह भी पता चला कि ऐसे फर्जी मरीजों के ईलाज से होने वाली आमदनी का एक हिस्सा संबंधित अधिकारियों के बीच भी बंटता है। बताते चलें कि हाल ही में सीएजी ने एक ही नंबर पर करीब एक लाख मरीजों के ईलाज संबंधी मुद्दा उठाया तो था।

यह मामला उठते ही संबंधित अधिकारियों का अन्यत्र तबादला कर दिया गया। शायद कमाई के इस माध्यम को जानकर ही अनेक अफसर यहां पदस्थापित होने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा देते हैं। किस अस्पताल से कितनी कमाई हो रही है, यह तो विवरण से मासिक तौर पर पता चलता ही रहता है। उसी अनुपात में ऐसे नाम के अस्पतालों और क्लीनिकों से वसूली भी होती रहती है।

ऐसे फर्जीवाड़ा की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा कि अगर किसी तीसरे पक्ष में अस्पतालों और वहां दर्ज मरीजों के रिकार्डों की जांच होने लगी तो पता चलेगा कि सरकार का करोड़ों रुपया हर माह इस गोरखधंधे में डूब रहा है। वैसे इसमें सिर्फ ऐसे अस्पताल अथवा क्लीनिक के लोग ही मालामाल नहीं हो रहे हैं बल्कि अफसरों को भी इससे अच्छी खासी कमाई हो रही है।