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रघुवर दास को राज्यपाल बनाने पर झामुमो का बयान

  • बैंक लेनदेन का ब्योरा जांचे ईडी भी

  • शराब कारोबार का सच सभी जानते हैं

  • निगरानी जांच आगे बढ़ी तो ईडी को लाया

राष्ट्रीय खबर

रांचीः झामुमो के एक बयान की वजह से राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा होने लगी है कि क्या जांच एजेंसियों की आंच से बचाने के लिए ही रघुवर दास को उड़ीसा का राज्यपाल बनाया गया है। इससे पहले ही कई मामलों की जांच राज्य का निगरानी विभाग कर रहा है, जिनके बारे में लोगों को भी पहले से ही जानकारी है।

यह सभी मामले रघुवर दास जब राज्य के मुख्यमंत्री थे, उस दौर के हैं। योगेंद्र तिवारी को ईडी द्वारा रिमांड पर लेने के बाद भाजपा की तरफ से कई बयान आये थे। इसके बाद झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि उन्होंने योगेन्द्र तिवारी को लेकर जो तीन माह पूर्व ही आशंका व्यक्त कर दी थी, वो अब रुप ले रहा है।

उन्होंने कहा कि योगेन्द्र तिवारी तो एक छोटा सा प्यादा है, उसके साथ तो भाजपा के बड़े-बड़े नेता जुड़े हैं, उन भाजपा से जुड़े उनके निजी सचिव जैसे लोग जुड़े हैं। सुप्रियो ने कहा कि योगेन्द्र तिवारी को किन लोगों ने बनाया इसका खुलासा तो तब होगा जब जिनके द्वारा कंपनियां बनाई गई, उनमें कौन कौन लोग शामिल रहे हैं, इसकी जांच हो।

ईडी भी कार्रवाई तो कर रही है पर उसे भी पता है कि निशाने पर कौन लोग आ रहे हैं। यह अलग बात है कि भाजपा के इशारे पर ईडी सिर्फ हेमंत सोरेन की सरकार को अस्थिर करने पर जुटी हुई है। शराब का गोरखधंधा रघुवर दास के कार्यकाल में प्रारंभ हुआ था यह कोई गोपनीय तथ्य नहीं है।

सुप्रियो ने कहा कि राज्य सरकार जैसे ही एसीबी के द्वारा जांच करा रही थी। एसीबी जैसे-जैसे जांच में आगे बढ़ रही थी। दायरा जांच का अब सिकुड़ता जा रहा था तो भाजपा के एक नेता को राज्यपाल बना दिया गया। सुप्रियो का इशारा भाजपा नेता रघुवर दास की ओर था। उन्होंने कहा कि ईडी क्यों नहीं मनी लॉउड्रिंग का मामला होने पर भी बैंक के सारे ट्रांजेक्शन को देखती है, उसके लिए तो ऐसा करना बहुत ही आसान है।

ईडी ऐसा नहीं करेगी क्योंकि ऐसा करने पर भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं का नाम आ जायेगा। भाजपा का चाल, चरित्र व चेहरा उजागर हो जायेगा तो वो ऐसा करने से बचना चाहती है। जबकि ईडी अच्छी तरह जानती है कि भाजपा के नेताओं का आज भी उनलोगों से रिश्ते बदस्तूर कायम है।

सुप्रियो ने हेमन्त सरकार से मांग की वो जितना जल्द हो सके, इस पर एसआइटी का गठन कर जांच प्रारंभ करायें एवं साजिशकर्ताओं को जनता के सामने रखने का काम करें, क्योंकि राज्य के पास भी अपना तंत्र हैं और उसे अपने तंत्र का भी इस्तेमाल करना ही चाहिये। इस शराब के खेल में कौन-कौन लोग अब तक शामिल रहे है?

भाजपा से जुड़े किन-किन व्यक्तियों की इसमें कौन-कौन सी भूमिका रही है? पता तो लगना ही चाहिए कि भाजपा के किस वर्तमान से पूर्व विधायक की इसमें क्या कारगुजारी रही हैं। इस बयान के बाद फिर से सारा मामले पूर्व की सरकार की तरफ मुड़ता नजर आने की वजह से ही यह सवाल उठ रहा है कि आनन फानन में रघुवर दास को उड़ीसा का राज्यपाल बनाने का फैसला कहीं इस जांच की आंच स  उन्हें बचाना तो नहीं है।