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अडाणी कांड में जेपीसी की मांग उठाएगी कांग्रेस

  • नये भवन में आयोजित होगा सत्र

  • कांग्रेस के नेताओं की बैठक आयोजित

  • असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः तमाम किस्म के घटनाक्रमों के बाद भी कांग्रेस ने संसद के आगामी सत्र के लिए अपमना लक्ष्य तय कर लिया है। वह इस सत्र में सरकार को सबसे अधिक अडाणी मुद्दे पर घेरने जा रहा है। संसद के विशेष सत्र के दौरान मोदी सरकार की जवाबी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर कांग्रेस के संसदीय रणनीति समूह की बैठक बुलाई गई थी। इससे पहले ही कांग्रेस के दो नेताओँ ने यह साफ कर दिया है कि वे संसद में फिर से मोदी चालीसा सुनने के लिए नहीं जाएंगे।

संसद का एजेंडा घोषित नहीं होने की वजह से दूसरे मुद्दे भी चर्चा में आ सकते हैं। मसलन महिला आरक्षण बिल या रोहिणी आयोग की रिपोर्ट में ओबीसी के आरक्षण में अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग रकम की घोषणा। नए संसद भवन में पहले सत्र के लिए गणेश चतुर्थी का समय चुन रहे हैं या फिर जी2 0 कार्यक्रम ने चंद्रयान-3 की सफलता पर पर्दा डालकर 2047 में विकसित भारत का सपना दिखा दिया। विपक्षी खेमा अभी भी इस बात से असमंजस में है कि मोदी सरकार ने अचानक 18 सितंबर से संसद का विशेष सत्र क्यों बुलाया है।

मोदी सरकार की योजना जो भी हो, कांग्रेस संसद के विशेष सत्र में अडानी मामले की संयुक्त संसदीय समिति या जेपीसी जांच और चीन की आक्रामकता के सामने मोदी सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाएगी। कांग्रेस का आरोप है कि विदेशी प्रेस ने हाल ही में अडानी समूह की अवैध गतिविधियों और मोदी सरकार की निष्क्रियता को उजागर किया है। उससे ध्यान भटकाने के लिए मोदी सरकार ने सबसे पहले ‘एक देश, एक चुनाव’ को लेकर आंदोलन शुरू किया। इसके बाद अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाएगा।

मोदी के नेतृत्व में ओबीसी वोट बैंक बीजेपी की ताकत में से एक बन गया है। इसके चलते सपा, जेडीयू, राजद जैसी पार्टियों ने जाति गणना की मांग उठाई है। उनके मुताबिक अब 27 फीसदी सीटें ओबीसी के लिए आरक्षित हैं। यदि जनगणना में ओबीसी आबादी का 40 प्रतिशत या अधिक पाया गया तो आगे आरक्षण की मांग की जाएगी। मोदी सरकार पर ओबीसी और ऊंची जाति दोनों पक्षों का दबाव रहेगा। जवाबी कदम में मोदी सरकार ओबीसी के उन पिछड़े समूहों के लिए एक निश्चित मात्रा में आरक्षण की व्यवस्था कर सकती है जिन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है। आयोग का गठन 2017 में सेवानिवृत्त न्यायाधीश जी रोहिणी के नेतृत्व में किया गया था। हाल ही में आयोग ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। विपक्ष के एक वर्ग का मानना ​​है कि रिपोर्ट संसद के विशेष सत्र में पेश की जा सकती है।

विपक्षी खेमे के एक वर्ग को लगता है कि मोदी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले महिला वोट बैंक और ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करना चाहती है। महिला वोट बैंक को मजबूत करने के लिए 2024 से पहले महिला आरक्षण बिल पेश किया जा सकता है। यूपीए काल में महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने की कोशिशें असफल रहीं। इस बार मोदी सरकार सावधानी बरतने की कोशिश कर सकती है।

कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के नेताओं का मानना ​​है कि नए संसद भवन का उद्घाटन तो 28 मई को हो गया, लेकिन उस वक्त इसका काम पूरा नहीं हुआ था। इसके बाद पुराने भवन में बादल अधिवेशन हुआ। मोदी सरकार ने हिंदू राष्ट्र के संस्थापक विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर ही संसद का उद्घाटन करने के लिए वह दिन चुना। इस बार नए संसद भवन में 18 से 22 सितंबर तक सिर्फ पांच दिनों का विशेष सत्र बुलाया गया है। हिंदू धर्म में सभी पूजाओं की शुरुआत गणेश पूजा से होती है। 19 सितम्बर गणेश चतुर्थी। हो सकता है इसीलिए उस वक्त विशेष सत्र बुलाया गया हो। विपक्ष को जानकारी मिली है कि एक दिन नए संसद भवन की भव्यता पर चर्चा होगी।

इसके बीच भारत और इंडिया विवाद और उदयनिधि के सनातन और द्रविड संस्कृति का बहस भी अडाणी मुद्दे से ध्यान भटकाने का तरीका मानकर कांग्रेस इन पर अभी ध्यान नहीं दे रही है। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में सेबी द्वारा दाखिल अंतरिम जांच रिपोर्ट ने भी यह संदेह और पुख्ता कर दिया है कि विदेशी पूंजी निवेश की स्थिति पारदर्शी नहीं है। इसलिए कांग्रेस बार बार यह सवाल उठा रही है कि आखिर यह पैसा किसका है, जो गौतम अडाणी के भाई विनोद अडाणी के माध्यम से देश में भेजा गया है।