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स्कूल के बाहर महिला की गोली मारकर हत्या

  • मणिपुर की स्थिति पर चर्चा की मांग खारिज

  • विपक्षी सांसदों का पैनल की बैठक से वॉकआउट

  • नरेंद्र मोदी की चुप्पी की विपक्ष ने की आलोचना

पूर्वोत्तर संवाददाता

गुवाहाटी : मणिपुर में हिंसा को लेकर पिछले दो महीने से तनाव की स्थिति है। इस तनाव में थोड़ी कमी के बाद राज्य सरकार ने स्कूलों को कोलने का निर्णय लिया था। राज्य में स्कूलों की कक्षाएं फिर से शुरू होने के एक दिन बाद गुरुवार सुबह मणिपुर के इंफाल पश्चिम जिले में एक स्कूल के पास एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस बात की जानकारी दी है।

पुलिस ने बताया कि घटना सुबह करीब 8:40 बजे शिशु निष्ठा निकेतन स्कूल के पास हुई। महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मणिपुर में चल रही जातीय हिंसा के मद्देनजर स्कूल दो महीने से अधिक समय से बंद हैं।मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने सोमवार को घोषणा की कि सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में 96 स्कूलों को छोड़कर, कक्षा 8 तक के लिए स्कूल 5 जुलाई से फिर से खुलेंगे।

सिंह ने घोषणा की कि पूर्वनिर्मित घरों का निर्माण पूरा होने और विभिन्न राहत शिविरों में शरण लेने वाले विस्थापित लोगों को स्थानांतरित करने के बाद कक्षा 9 से 12 तक के छात्र वापस आ सकते हैं। पूर्वोत्तर राज्य में जनजातीय समुदायों – मैतेई और कुकी – के बीच जातीय झड़पें देखी जा रही हैं, जिसमें अब तक कम से कम 142 लोगों की मौत हो चुकी है, 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं और लगभग 70,000 लोग विस्थापित हुए हैं।

दूसरी ओर, संसद की गृह संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष द्वारा मणिपुर की स्थिति पर चर्चा कराने की मांग अस्वीकार किये जाने के बाद विपक्षी सदस्यों ने बृहस्पतिवार को इसकी बैठक से ‘वाकआउट’ (बहिर्गमन) किया। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि ‘कारागार स्थिति, अवसंरचना और सुधार’ के विषय पर आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना की राज्य सरकारों के विचार सुनने को लेकर बुलाई गई इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह एवं प्रदीप भट्टाचार्य ने समिति के अध्यक्ष बृजलाल को एक संयुक्त पत्र सौंपा।

पत्र में कहा गया कि सदस्य मणिपुर की स्थिति को नजरंदाज नहीं कर सकते हैं।विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी की आलोचना की है और “मणिपुर में हिंसा को रोकने में विफल रहने के लिए केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार की फूट डालो और राज करो की राजनीति” को जिम्मेदार ठहराया है।

19 जून को लिखे एक पत्र में विपक्ष ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के राज्य के दौरे के बावजूद, शांति आना मुश्किल है। कांग्रेस ने मांग की कि प्रधानमंत्री मोदी एक सर्वदलीय बैठक बुलाएं क्योंकि पहली बैठक गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में बुलाई गई थी। एआईसीसी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि किसी भी राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी कानून व्यवस्था और अपने नागरिकों के जीवन की रक्षा करना है।

उन्होंने आरोप लगाया, मुझे लगता है कि राज्य और केंद्र दोनों सरकारें ऐसा करने में विफल रही हैं।इधर, मणिपुर के कांगपोकपी जिले में दो सशस्त्र समूह एकत्र हुए और उन्होंने गोलियां चलाईं लेकिन सुरक्षा बलों ने तत्काल इलाके में पहुंच कर किसी भी प्रकार की झड़प को टाल दिया।मणिपुर के कांगपोकपी जिले में दो सशस्त्र समूह एकत्र हुए और उन्होंने गोलियां चलाईं लेकिन सुरक्षा बलों ने तत्काल इलाके में पहुंच कर किसी भी प्रकार की झड़प को टाल दिया।

सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह घटना बुधवार दोपहर तीन बजकर 40 मिनट पर फेलेंग गांव के पास हुई।सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जातीय हिंसा से प्रभावित राज्य में बार-बार इंटरनेट बंद करने के खिलाफ मणिपुर के दो निवासियों की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और उन्हें इस मामले पर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की आजादी दी।

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि मणिपुर उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के पास पहले से ही यह मामला है जिसमें एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था और यह जांच करने का निर्देश दिया गया था कि क्या राज्य में इंटरनेट बहाल किया जा सकता है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील शादान फरासत ने कहा कि मामला मणिपुर में इंटरनेट प्रतिबंध से संबंधित है। इस स्तर पर, इस तथ्य का सामना करते हुए कि अनुच्छेद 226 के तहत एक याचिका उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है, श्री फरासत ने लंबित मामले को वापस लेने और उसमें हस्तक्षेप करने या एचसी के समक्ष एक स्वतंत्र याचिका दायर करने की अनुमति मांगी है।

हम उन्हें ऐसा करने की अनुमति देते हैं। सभी अधिकार और विवाद खुले हैं, पीठ ने कहा। शीर्ष अदालत चोंगथम विक्टर सिंह और मायेंगबाम जेम्स द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया है कि शटडाउन भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार और इंटरनेट के संवैधानिक रूप से संरक्षित माध्यम का उपयोग करके किसी भी व्यापार या व्यवसाय को करने के अधिकार में हस्तक्षेप के मामले में बेहद असंगत था।