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35 साल पुराने केस में दस महीने की कैद के बाद निकले सिद्धू

  • कहा देश में अभी लोकतंत्र खतरे में है

  • सुबह से ही बाहर लगी थी समर्थकों की भीड़

  • ढोल नगाड़ों के बीच ही अभिवादन किया

  • कांग्रेस की गतिविधियां भी तेज होंगे

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़ः पूर्व अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू आज पटियाला जेल से बाहर निकले। उनके बाहर निकलने की खबर कल ही सार्वजनिक हो गयी थी। इसमें कहा गया था कि आज सुबह के दस बजे के बाद वह जेल से बाहर आयेंगे। इसी सूचना पर जेल के बाहर सुबह से ही उनके समर्थकों की भारी भीड़ एकत्रित हो गयी थी।

लेकिन वह शाम को छह बजे के बाद बाहर निकले। बता दें कि सड़क पर हुई मारपीट और एक व्यक्ति की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 19 मई को सिद्धू को एक साल की सजा सुनाई थी। कांग्रेस नेता सिद्धू ने  पटियाला जेल से निकलते ही मीडिया से बात की।

इस बीच सिद्धू के रिहा होने से पहले ही पटियाला जेल के बाहर कांग्रेस के कई कार्यकर्ता पहुंचे।पटियाला जेल के बाहर ढोल-नगाड़े बजाकर सिद्धू का स्वागत किया गया। समर्थकों का आभार व्यक्त करने तथा नेताओं से मिलने के बाद वह सीधे अपने घर की तरफ निकले। जहां वह सबसे पहले अपनी बीमार चल रही पत्नी से मुलाकात करेंगे। इसके आगे के कार्यक्रम के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी है।

जेल से बाहर निकलते ही कांग्रेस नेता सिद्धू ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा, देश में लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं बची है। पंजाब में राष्ट्रपति शासन लाने की साजिश अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। पंजाब में राष्ट्रपति शासन लाने की साजिश की जा रही है, अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है।

सिद्धू ने सरकार को चुनौती दी कि पंजाब को कमजोर करने की कोशिश की तो खुद कमजोर हो जाओगे। जेल के बाहर ही ऐसा बयान देकर सिद्धू ने साफ कर दिया है कि उनके सक्रिय होने पर पंजाब में कांग्रेस की गतिविधियों में भी सक्रियता आयेगी।

वैसे इस क्रम में वह मामला फिर से चर्चा में आ गया, जिसकी वजह से पंजाब कांग्रेस के इस कद्दावर नेता को जेल जाना पड़ा था। दरअसल 27 दिसंबर 1988 की शाम सिद्धू अपने रूपिंदर सिंह संधू के साथ पटियाला के शेरावाले गेट की मार्केट में पहुंचे थे। इसी मार्केट में कार पार्किंग को लेकर उनकी 65 साल के बुजुर्ग गुरनाम सिंह से कहासुनी हो गई।

बात हाथापाई तक जा पहुंची। सिद्धू ने गुरनाम सिंह को घुटना मारकर गिरा दिया। उसके बाद गुरनाम सिंह को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। रिपोर्ट में आया कि गुरनाम सिंह की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। उसी दिन सिद्धू और उनके दोस्त रूपिंदर पर कोतवाली थाने में गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज हुआ।

इसके बाद सेशन कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई।1999 में सेशन कोर्ट ने ने केस को खारिज कर दिया। इसके बाद केस हाई कोर्ट पहुंचा और दिसंबर 2006 को हाईकोर्ट ने सिद्धू और संधू को दोषी ठहराते हुए 3-3 साल कैद की सजा सुनाई, साथ ही 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

मई 2018 में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने सिद्धू और संधू को रोड रेज के मामले में दोषी ठहराते हुए 3-3 साल कैद की सजा सुनाई। फिर इस सजा के ऐलान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।मामले पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू और संधू को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। हालांकि, कोर्ट ने रोड रेज मामले में सिद्धू पर 1 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसी फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को एक साल की सजा सुनाई गई थी।