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राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द

  • जानकार मानते हैं यह श्राप में वरदान है

  • केंद्र सरकार की हड़बड़ी से सभी विरोधी नाराज

  • विपक्ष ने आवाज दबाने का आरोप एक सुर में लगाया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सूरत की अदालत में राहुल गांधी को सजा सुनाये जाने के चौबीस घंटे के बाद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गयी। अब घटनाक्रम कुछ ऐसे नजर आ रहे हैं जिससे इसे श्राप में वरदान माना जा रहा है। यह अयोग्यता और संभावित जेल भी राहुल गांधी के राजनीतिक जीवन में एक मददगार साबित हो सकता है और अगर कांग्रेस ने ठीक ढंग से काम किया तो वह इसे अपने फायदे के अवसर में भी बदल सकती है। इस फैसले के बाद कांग्रेस फिर से मैदान में उतर भी आयी है।

वैसे सूरत अदालत द्वारा 23 मार्च को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एक आपराधिक मानहानि के मामले में दो साल की कैद की सजा सुनाने का आदेश कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है। यह विशेष रूप से इसलिए है क्योंकि यह ऐसे समय में आया है जब पुरानी पार्टी अब सत्ताधारी भाजपा के खिलाफ अपने आक्रमण को तेज कर रही है।

वैसे यहां के राजनीतिक जानकार इसे दरअसल भाजपा की बड़ी भूल के तौर पर आंक रहे हैं। उनके लिए यह दरअसल राहुल गांधी और कांग्रेस दोनों के लिए श्राम में वरदान है जबकि भाजपा ने इस एक फैसले से पूरे विपक्ष को फिर से एकजुट होने का मौका दे दिया है। कांग्रेस ने इसे नेता को चुप कराने के लिए एक षड्यंत्र कहा है।

कांग्रेस ने फिर से यह आरोप दोहराया है कि दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने विरोधियों को किसी भी कीमत पर चुप कराने के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं। लोकसभा सचिवालय ने केरल के वायनाड में उनके निर्वाचन क्षेत्र को भी खाली घोषित कर दिया। चुनाव आयोग अब इस सीट के लिए विशेष चुनाव की घोषणा कर सकता है।

श्री गांधी को अपना सरकारी बंगला खाली करने के लिए एक महीने का समय मिलेगा। अदालत ने सजा सुनाने के साथ साथ उन्हें जमानत भी दे दी और 30 दिनों के लिए सजा को निलंबित कर दिया ताकि उन्हें उच्च न्यायालय में अपील करने की अनुमति मिल सके। लेकिन कानून के अनुसार, किसी भी सांसद को अपराध का दोषी ठहराया जाता है और कम से कम दो साल की जेल की सजा सुनाई जाती है।

श्री गांधी, एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसने भारत को तीन प्रधान मंत्री दिए हैं। जिनमें से दो ने देश के लिए शहादत दी है। इसलिए आम जनता इस हड़बड़ी वाले फैसले को उस नजर से कतई नहीं देख रही है, जिस नजरिए से भाजपा इसे आंक रही है। वैसे भी अपनी भारत जोड़ो यात्रा के जरिए राहुल गांधी अपनी उस छवि को बदल चुके हैं, जिसे भाजपा ने एक तैयारी के तहत प्रसारित और प्रचारित किया था।

कांग्रेस ने कहा है कि राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई है। वह जनता के लिए सड़कों से लेकर संसद तक लगातार लड़ रहे हैं, लोकतंत्र को बचाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। हर साजिश के बावजूद, वह हर कीमत पर इस लड़ाई को जारी रखेंगे और न्याय करेंगे। पार्टी ने अपने सोशल मीडिया डिस्प्ले पिक्चर को भी डरो मत शब्दों के साथ राहुल गांधी को प्रसारित किया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने इस फैसले को गलत  बताया। उन्होंने कहा कि लोकसभा सचिवालय किसी सांसद को अयोग्य नहीं ठहरा सकता है। राष्ट्रपति को इसे चुनाव आयोग के परामर्श से करना होता है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे तानाशाही का उदाहरण बताया। कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने कहा कि वह इस कदम से स्तब्ध हैं।

कई विपक्षी नेताओं ने इस फैसले पर हैरानी जताई है और भाजपा पर निशाना साधा है। दूसरी तरफ भाजपा ने कहा है कि सजा एक स्वतंत्र न्यायपालिका से आई है, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने श्री गांधी पर एक अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय का अपमान करने का आरोप लगाया है।

राहुल गांधी की टीम ने पहले ही कहा है कि वे फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे। यदि आदेश रद्द नहीं किया जाता है, तो श्री गांधी को अगले आठ वर्षों तक चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने याद किया कि कैसे श्री गांधी अयोग्यता से बच सकते थे यदि 2013 में कांग्रेस सरकार द्वारा पेश किया गया एक आदेश जो सजायाफ्ता सांसदों को अपनी सीटों को बनाए रखने के लिए तीन महीने का समय देता था।

श्री गांधी ने सार्वजनिक रूप से अध्यादेश की आलोचना की थी, इसे प्रसिद्ध रूप से पूर्ण बकवास कहते हुए इसे फाड़ दिया था। अतीत में कई वरिष्ठ सांसदों को विधानसभाओं से अयोग्य घोषित किया गया है। इंदिरा गांधी, राहुल गांधी की दादी, को 1977 में एक अदालत के फैसले से थोड़े समय के लिए चैंबर से बाहर कर दिया गया था, जबकि वह प्रधान मंत्री थीं। लेकिन विपक्षी दलों का कहना है कि हाल के वर्षों में मोदी सरकार की आलोचना करने वाले विपक्षी दलों के आंकड़ों और संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में तेजी देखी गई है।