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वैज्ञानिकों को खुद ही उम्मीद नहीं थी वॉयजर से, देखें वीडियो

  • सिर्फ पांच साल के शोध पर भेजा गया था

  • धरती से खरबों मील की दूरी तक पहुंच गये

  • वर्ष 2030 में शायद संपर्क खत्म हो जाएगा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः नासा का यह अंतरिक्ष यान खुद नासा के वैज्ञानिकों को ही हैरान कर चुका है। दरअसव वर्ष 1977 में जब दो वॉयजर यानों को अंतरिक्ष में रवाना किया गया था तो किसी को उनके अब तक सक्रिय होने की उम्मीद नहीं थी। लेकिन तमाम आकलनों को गलत साबित कर यह यान आगे बढ़ रहे हैं।

देखें नासा का वह वीडियो

पिछले चार दशक से सक्रिय इन यानों को हमारी सौरमंडल के सबसे अंतिम छोर तक पहुंचने में भी तीन सौ वर्ष और लगेंगे। वॉयजर 1 और 2  नाम के इन दोनों अंतरिक्ष यानों को पांच साल  के शोध के लिए रवाना किया गया था। हमारी सौरमंडल से बाहर सबसे नजदीकी तारा तक पहुंचने में वॉयजर 1 को अभी एक लाख चालीस हजार साल लगेंगे। सोलह दिनों के अंतराल में छोड़े गये इन अंतरिक्ष यानों को दरअसल सूर्य की परिधि की अंतिम सीमा तक जाने के मकसद से तैयार किया गया था।

उन्हें जूपिटर, सैटर्न, यूरेनस और नेपचुन तथा उनके आस पास की स्थिति पर गौर करना था। इस लक्ष्य का अधिकांश हिस्सा पूरा करने के बाद भी दोनों यान सक्रिय रहे और अपने नियंत्रण कक्ष में संपर्क में बने रहे।

अब 45 साल बीत जाने के बाद भी दोनों यान अंतरिक्ष की तमाम चुनौतियों का सफलता पूर्वक सामना कर आगे बढ़ रहे हैं, यही अचरज का विषय है। इसी वजह से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वॉयजर 1 को ओरूटक्लाउट के सौर इलाके में पहुंचने में तीन सौ वर्ष लगेंगे जबकि वॉयजर 2 को सिरियस सौरमंडल को पार करने में दो लाख 96 हजार वर्ष का समय लगेगा। दरअसल नियंत्रण कक्ष के वैज्ञानिकों ने अब इन दोनों यानों के उन उपकरणों को निर्देश देकर बंद कर दिया है, जिनकी अब कोई उपयोगिता नहीं रह गयी है।

इस वजह से यान की ऊर्जा संबंधी आवश्यकताएं कम हो गयी हैं। दूसरी तरफ काफी दूर जाने के बाद सौर मंडल के अपने प्रभाव से उनकी गति भी तेज हो गयी है। अबतक के अनुमान के मुताबिक वहां जो हीटर लगे हुए हैं उनकी बदौलत सारे यंत्र वर्ष 2030 तक सकुशल अवस्था में रहेंगे। उसके बाद शायद यहां के नियंत्रण कक्ष से उसका संपर्क टूट जाएगा। लेकिन अत्याधुनिक खगोल दूरबीनों की मदद से उनकी प्रगति को देखा जा सकेगा।

नासा के अनुमान को गलत साबित कर दोनों यान अलग अलग रास्तों पर आगे बढ़ रहे हैं। वर्तमान में वॉयजन 2 इस धरती से करीब 12.3 बिलियन मील की दूरी पर है। दूसरी तरफ बॉयजर 1 को दूसरे सौरमंडल के सबसे नजदीकी तारा एसी प्लस 79 3888 के करीब जाने में चालीस हजार साल लग जाएंगे। वह ओरूट क्लाउड के उस क्षेत्र में पहुंचेगा जहां खरबों की संख्या में जमे हुए तारे मौजूद हैं। इसी क्रम में नासा ने कहा है कि वॉयजर 2 को इस आकाश पर नजर आने वाले सबसे चमकीला तारा सिरियस के करीब पहुंचने में दो लाख 86 हजार साल लगेंगे।

अपनी यात्रा के दौरान इन दोनों यानों ने अंतरिक्ष की कई नई जानकारी अपने नियंत्रण कक्ष को भेजी है। इनमें एक तस्वीर ऐसी भी है जो चार बिलियन मील की दूरी से बिल्कुल धरती के जैसे नजर आने वाले किसी खगोलीय पिंड की है। दोनों यान अपनी यात्रा के दौरान सौर आंधी, गैस और आवेशित कणों का सामना करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। इस सफर ने अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को उस इलाके की परिस्थितियों को समझने में मदद की है। इस बारे में नासा के जेट प्रापलस्न लैब के प्रोजेक्ट मैनेजर सूजाने डोड ने कहा कि इन आंकड़ों से भविष्य के अंतरिक्ष अभियान की योजना बनाने में बहुत मदद मिली है।