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ऑस्ट्रेलियन एजेंसी का दावा चीन में हर रोज नौ हजार मौतें

कैनबेराः ऑस्ट्रेलिया की एक शोध एजेंसी ने चीन के बारे में चिंताजनक रिपोर्ट जारी की है। एयरफिनिटी नामक इस एजेंसी का कहना है कि उसकी सूचना के मुताबिक चीन में हर रोज अभी नौ हजार लोगों की मौत हो रही है। दूसरी तरफ चीन की सरकार ने कोरोना संबंधी दैनिक आंकड़ों को जारी करने का क्रम पिछले कुछ दिनों से बंद कर रखा है। इस वजह से सच्चाई का पता भी नहीं चल पा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां संक्रमण फैलने पर अब तक कोई लगाम नहीं लग पायी है। दूसरी तरफ तेजी से ध्वस्त होती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए चीन की सरकार ने कोविड प्रतिबंधों को हटा लिया है। इसके बाद भी ऑमीक्रॉन का नया स्वरुप वहां तबाही मचा रहा है। इस वजह से यह आशंका भी जतायी जा रही है कि शायद चीन का अपना वैक्सिन इस नये स्वरुप पर असरदार नहीं है।

इस वजह से वैक्सिन लेने वाले भी जान गंवा रहे हैं। यह सूचना पहले ही सार्वजनिक हो चुकी है कि वहां के कब्रिस्तानों में अभी लाशों का अंबार लगा है। साथ ही सारे अस्पताल भी पूरी तरह कोरोना के रोगियों से भरे हुए हैं। सरकारी स्तर पर जो अस्थायी कोरोना अस्पताल बनाये गये थे, वहां भी अब नये मरीज के लिए बेड नहीं है। इस कारण बीमार लोग अस्पताल के फर्श पर पड़े हुए अपना ईलाज करा रहे हैं।

एयरफिनिटी की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के अलग अलग इलाकों में संक्रमण के जो गैर सरकारी आंकड़े मिले हैं, उससे साफ है कि कोरोना का विस्फोट हो गया है और चीन की सरकार की वर्तमान नीति उसे रोक पाने में पूरी तरह विफल हो गयी है। नवंबर से अब तक का हाल देखकर यह अनुमान लगाया गया है कि चीन में जनवरी के अंत तक कुल करीब छह लाख लोगों की मौत होगी। वहां से छनकर आयी सूचनाओँ के हवाले से इस एजेंसी ने यह भी कहा है कि वहां मामूली तौर पर बीमार अथवा संक्रमण के लक्षण वाले कर्मचारियों को भी काम करने का कड़ा निर्देश दिया गया है।

इस वजह से भी संक्रमण फैलने की गति अत्यधिक तेज हो गयी है। ब्रिटिश वायरस विशेषज्ञ जोनाथन लैथम ने कहा है कि दरअसल ऐसे मामलों में भी चीन की गोपनीयता बरतने की बीमारी की वजह से दुनिया के दूसरे इलाकों तक यह संक्रमण फिर से फैला है। इसके पहले भी इस किस्म की गोपनीयता की वजह से चीन के वुहान से फैली कोरोना की बीमारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था। वैसे दुनिया में ऑमीक्रॉन से कम मौत होने के बाद भी चीन में हालात इतने बुरे क्यों हैं, इस पर वायरस विशेषज्ञ चिंतित हो रहे हैं।