अमेरिकी मध्यावधि चुनाव परिणाम के बाद विपक्ष का बयान
तानाशाही प्रवृत्तियों का अंत हो रहा है
लोकतंत्र आम नागरिकों का हथियार है
जिम्मेदारी तय करने का समय आ गया
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः अमेरिकी मध्यावधि चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए विपक्ष के नेताओं ने कहा है कि बदलाव की बयार बह रही है। विपक्षी नेताओं ने बुधवार को अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के नतीजों का उल्लेख करते हुए इस बात पर जोर दिया कि जनता की सामूहिक शक्ति तानाशाही प्रवृत्तियों को परास्त कर सकती है। जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि बदलाव हवा में महसूस हो रहा है, वहीं पार्टी के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने कार्यपालिका के कार्यों की जवाबदेही तय करने में मध्यावधि चुनावों के महत्व को रेखांकित किया।
वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका के नतीजे यह दर्शाते हैं कि आम लोगों की एकजुटता उस समय भी तानाशाही सोच को हरा सकती है, जब उसे बड़े कॉरपोरेट घरानों, बिकी हुई मीडिया और नफरत फैलाने वाले डिजिटल मंचों का समर्थन प्राप्त हो। उन्होंने तर्क दिया कि लोकतंत्र आम नागरिकों का है, किसी अरबपति या शक्तिशाली ताकतों का नहीं। जब लोग एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए खड़े होते हैं, तो वे सबसे शक्तिशाली शक्तियों को भी हरा सकते हैं।
जयराम रमेश ने इन परिणामों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ एक आश्चर्यजनक जनादेश करार दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्तियों से इतर, ये परिणाम मध्यावधि चुनावों के माध्यम से जवाबदेही तय करने की शक्ति को साबित करते हैं। भारत के संदर्भ में उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘एक देश, एक चुनाव’ का विचार इस लोकतांत्रिक हथियार को कमजोर कर देगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के इन चुनावों ने संवैधानिक लोकतंत्र के संतुलन को बहाल किया है, जो भारत में वर्ष 2014 के बाद से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने कहा कि जब मनमानी ही सामान्य बात बन जाती है, तो जनता इस तथाकथित नए नियम को तोड़ना अच्छी तरह जानती है।
दूसरी ओर, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने डेमोक्रेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद की जीत पर टिप्पणी की, जो अमेरिकी सीनेट में पहुंचने वाले पहले मुस्लिम सदस्य होंगे। ओवैसी ने कहा कि मिशिगन में एक अब्दुल ने जीत हासिल की है और अब उत्तर प्रदेश के अब्दुल को भी अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करनी होगी। राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक बड़े झटके के रूप में, अमेरिकी मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी को अमेरिकी कांग्रेस का नियंत्रण सौंप दिया है और कई प्रमुख राज्यों में राज्यपाल के पद भी अपनी ओर कर लिए हैं। इस हार का मुख्य कारण ट्रंप की नीतियों और ईरान युद्ध के कारण बढ़ी हुई महंगाई तथा महंगे डीजल से उपजा जन-आक्रोश माना जा रहा है।