अमेरिकी राष्ट्रपति की एक और बात सच साबित हुई
नूकः ग्रीनलैंड की संसद ने अमेरिका और डेनमार्क के साथ एक त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। मंगलवार को ग्रीनलैंड की 31 सीटों वाली संसद में हुए मतदान के दौरान यह प्रस्ताव 16-0 के भारी अंतर से पारित हो गया, जबकि 7 सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। इस समझौते पर सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, डेनिश प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने हस्ताक्षर किए थे।
यह समझौता कई महीनों की बैकचैनल बातचीत के बाद सामने आया है, जो डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संसाधन-समृद्ध इस विशाल आर्कटिक द्वीप को अमेरिकी नियंत्रण में लेने या खरीदने की बार-बार दी जा रही धमकियों के बाद उपजे तनाव को शांत करने के लिए की गई थी। ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री म्यूट एगेडे ने इस समझौते के अनुसमर्थन को द्वीप के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने फेसुबक पर लिखा, हमारे लिए एक जनता के रूप में यहां तक पहुंचने का रास्ता काफी कठिन रहा है। लेकिन हम अपने बुनियादी सिद्धांतों पर मजबूती से टिके रहे, संवाद का रास्ता चुना और अपने देश के हितों की जिम्मेदारी उठाई। यह हम सभी की सुरक्षा और अपने भविष्य को खुद तय करने के अधिकार के बारे में है।
गौरतलब है कि यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बीच स्थित 57,000 की आबादी वाला ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। ओपिनियन पोल के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई या नियंत्रण की धमकियों का अधिकांश स्थानीय नागरिकों ने कड़ा विरोध किया था। यह समझौता ग्रीनलैंड में अमेरिकी सेना की मौजूदगी और नए सैन्य ठिकानों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है।
अमेरिका को उत्तर-पश्चिम ग्रीनलैंड में स्थित अपने सुदूर पिटुफिक स्पेस बेस में गतिविधियों के आधुनिकीकरण और विस्तार की अनुमति मिली है। समझौते के अनुसार, ग्रीनलैंड डेनमार्क के ही नियंत्रण में रहेगा, लेकिन यदि भविष्य में यह द्वीप पूर्ण स्वतंत्रता का विकल्प चुनता है, तब भी यह समझौता लागू रहेगा। यह समझौता दोनों देशों के संसदों की मंजूरी के बाद ही पूर्ण रूप से लागू होगा। डेनिश संसद इस महीने के अंत में इस पर चर्चा और मतदान करेगी। हालांकि, इसे लागू करने के लिए अमेरिकी सीनेट की मंजूरी की आवश्यकता नहीं है।