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देश में नागरिक सुरक्षा के लिए साठ हजार को प्रशिक्षण

जम्मू कश्मीर सहित देश के बारह राज्यों की नई परियोजना

सीमा पर होगा इसका खास प्रशिक्षण

अतिरिक्त सुरक्षा तकनीक की जानकारी

ड्रोन तस्करी पर विशेष ध्यान होगा इसमें

राष्ट्रीय खबर

श्रीनगरः गृह मंत्रालय जम्मू-कश्मीर सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 60,000 स्वयंसेवकों का एक मजबूत नागरिक सुरक्षा नेटवर्क तैयार करने जा रहा है। आधुनिक और हाइब्रिड युद्ध, ड्रोन जागरूकता, हवाई हमले के खतरों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए गृह मंत्रालय भारतीय सेना के साथ मिलकर अपनी तरह का यह पहला संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा। यह अभ्यास एक पायलट प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में शुरू किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, प्रशिक्षण सत्रों की शुरुआत पाकिस्तान से सटी नियंत्रण रेखा के पास स्थित राजौरी के सीमावर्ती जिले और चंडीगढ़ के चंडी मंदिर क्षेत्र (पश्चिमी कमान) से की गई है, जो जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों को कवर करता है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, पहले चरण में भाग लेने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नागरिक सुरक्षा मास्टर ट्रेनरों को तीन दिनों का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

जम्मू और कश्मीर—जहां नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा दोनों स्थित हैं—गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय का मुख्य केंद्र बना हुआ है। पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए  ऑपरेशन सिंदूर , ड्रोन द्वारा गिराए जा रहे हथियारों की घटनाओं और आपातकालीन स्थितियों में खोज एवं बचाव अभियानों में ये स्वयंसेवक काफी मददगार साबित हो सकते हैं।

बयान के मुताबिक, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दृष्टिकोण से प्रेरित है, जिसमें उन्होंने आधुनिक तकनीकों और समकालीन तैयारियों से लैस एक जीवंत नागरिक सुरक्षा नेटवर्क का आह्वान किया था। ये मास्टर ट्रेनर हाइब्रिड युद्ध, ड्रोन के प्रति जागरूकता, हवाई हमले के खतरों से निपटने के साथ-साथ आग से सुरक्षा, रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों की पहचान, हताहत प्रबंधन, आपातकालीन संचार और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

विशेष रूप से सीमावर्ती राज्यों में ड्रोन एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बन गए हैं, जिनका उपयोग पाकिस्तान की सेना, आतंकी संगठन और आपराधिक तत्व हथियार और नशीले पदार्थ गिराने के लिए करते हैं। पंजाब और जम्मू क्षेत्र में ऐसी घटनाएं लगातार देखी गई हैं। इस पहल के तहत गृह मंत्रालय के महानिदेशालय (अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड्स) द्वारा भारतीय सेना के प्रशिक्षण संस्थानों में मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

इस पायलट प्रोजेक्ट में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, मेघालय, सिक्किम, असम, उत्तर प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं। नवंबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक 600 मास्टर ट्रेनरों (प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश से 50) को तैयार किया जाएगा। इसके बाद प्रत्येक मास्टर ट्रेनर अपने-अपने राज्यों में 100 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करेगा, जिससे कुल 60,000 नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों का एक प्रशिक्षित दल तैयार हो जाएगा।