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ऊटी राजमार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन

शनिवार की मूसलाधार बारिश के बाद यातायात प्रभावित

बेट्टाटी निवासी व्यक्ति की मौत हो गयी

एक ट्रक सौ फीट गहरी खाई में गिरा

दोनों तरफ से गाड़ियों का जाम लगा है

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः शनिवार को ऊटी में जारी मूसलाधार बारिश के कारण मेट्टुपालयम-ऊटी राष्ट्रीय राजमार्ग और मेट्टुपालयम-कोटागिरी राज्य राजमार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। बुरलियार के पास आधी रात के आसपास एक सरकारी बस पर मिट्टी और चट्टानें गिरने से उसके चालक की दुखद मौत हो गई। मृतक की पहचान ऊटी के बेट्टाटी निवासी 50 वर्षीय कनकराज के रूप में हुई है।

इसी दौरान, कोट्टायम के एक स्कूल का टूर ग्रुप उस समय रास्ते में फंस गया, जब उनकी बस के आगे चल रहा सब्जियों से लदा एक ट्रक बारिश के कारण अनियंत्रित होकर लगभग 100 फीट गहरी खाई में गिर गया। इस हादसे के बाद इलाके में भारी यातायात जाम लग गया। इस समूह में चिंघावनम के पल्लोम स्थित बुकाना गर्ल्स हाई स्कूल की 78 छात्राएं और आठ शिक्षक शामिल थे। यह दल अपनी स्कूली यात्रा से वापस लौट रहा था और शुक्रवार रात 11 बजे से ही सड़क पर फंसा हुआ था।

बचाव कर्मियों ने पेड़ गिरने से क्षतिग्रस्त हुई एक अन्य बस को सड़क के एक तरफ हटाया और रस्सियों के सहारे फंसे हुए छात्रों और शिक्षकों को सुरक्षित दूसरी ओर पहुंचाया। शिक्षकों ने पुष्टि की है कि समूह का हर सदस्य पूरी तरह सुरक्षित है। शनिवार तड़के तक उनके कोट्टायम लौटने की उम्मीद जताई गई थी।

छात्राओं और शिक्षकों को फिलहाल मेट्टुपालयम के एक स्कूल में स्थानांतरित किया जा रहा है। अत्यधिक जाम के कारण निकासी का काम धीमी गति से चल रहा है। शिक्षकों ने बताया कि तमिलनाडु प्रशासन द्वारा उनके लिए भोजन और पीने के पानी की व्यवस्था की गई है। यह घटना पूजा की छुट्टियों के दौरान हुई है, जब केरल के कई स्कूल ऊटी के लिए यात्राएं आयोजित करते हैं।

शुक्रवार रात से शनिवार सुबह तक नीलगिरि जिले और तलहटी में बसे शहर मेट्टुपालयम में लगातार तेज बारिश हो रही है। कुन्नूर मार्ग पर 14 स्थानों और कोटागिरी मार्ग पर तीन स्थानों पर भूस्खलन की सूचना मिली है। फिलहाल केवल एक बस कीचड़ में फंसी हुई है। नीलगिरि की जिला कलेक्टर लक्ष्मी भव्य तनेरू ने कहा कि जिले में पर्यटन गतिविधियों पर 26 अक्टूबर तक प्रतिबंध रहेगा। यात्री सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चल रहे हैं, जबकि जिला प्रशासन प्रभावित लोगों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था कर रहा है।