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माली में आईएसआईएस से जुड़े आतंकवादियों का तांडव

48 से अधिक लोगों की हत्या कर दी गयी

इसमें रूसी अफ्रीका कॉप्स की भूमिका

कई घरों को जला दिया गया है

इलाका से सैकड़ों नागरिक भागे

बामको: माली में इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) से जुड़े चरमपंथियों ने कम से कम 48 लोगों की निर्मम हत्या कर दी है। यह हमला रूस के अफ्रीका कॉर्प्स के सदस्यों सहित सरकार समर्थक बलों द्वारा कथित मुखबिरों पर किए गए हमलों के प्रतिशोध में किया गया है। माली के दो सुरक्षा सूत्रों और दो स्थानीय अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है। पूर्वी मेनाका क्षेत्र में सप्ताहांत में हुई यह हिंसा, क्षेत्रीय आईएसआईएस समूह और अल-कायदा से जुड़े संगठनों के बीच बढ़ रहे भीषण संघर्ष के बीच सामने आई है। इससे पश्चिमी अफ्रीका के साहेब क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है।

अनाम रहने की शर्त पर जानकारी देने वाले चारों सूत्रों ने बताया कि इस्लामिक स्टेट साहेल प्रोविंस के लड़ाकों द्वारा मेनाका के कम से कम पांच इलाकों में हमले किए गए। मंगलवार तक कुल मौतों के आंकड़े का आकलन किया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार, ये हमले पिछले सप्ताह क्षेत्र में सरकार समर्थक मिलिशिया एमएसए और बामको का समर्थन करने वाले रूसी अर्धसैनिक समूह अफ्रीका कॉर्प्स द्वारा किए गए कथित अत्याचारों के जवाब में किए गए थे।

मेनाका के एक नगरपालिका अधिकारी ने कहा,  माली की सेना और अफ्रीका कॉर्प्स के साथ आए एमएसए के मिलिशिया ने इस्लामिक स्टेट के मुखबिर होने के संदेह में नागरिकों पर अत्याचार किए। उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने करीब एक दर्जन लोगों को मार डाला, घरों में आग लगा दी और अन्य संपत्ति लूट ली।

चारों सूत्रों ने बताया कि रविवार को हुए जवाबी हमलों के दौरान आईएसआईएस के लड़ाकों ने घरों को आग के हवाले कर दिया और मवेशी लूट लिए, जिससे सैकड़ों नागरिकों को भागकर मेनाका शहर में शरण लेनी पड़ी। सूत्रों ने मरने वालों की शुरुआती संख्या 48 से लेकर 70 से अधिक बताई है। कुछ नागरिकों की मौत आग में झुलसने से हुई, जबकि कुछ अन्य को गोली मारी गई।

इस घटना की जिम्मेदारी अभी तक आईएसआईएस ने नहीं ली है। माली के सैन्य प्रवक्ता और बामको स्थित रूसी दूतावास ने इस पर टिप्पणी करने के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया है। इससे पहले माली आतंकवाद विरोधी अभियानों में नागरिकों की हत्या करने से इनकार करता रहा है।

माली वर्ष 2012 से विद्रोहियों से मुकाबला कर रहा है। गद्दाफी सरकार के पतन के बाद लीबिया से लौटे तुआरेग अलगाववादियों और अल-कायदा से जुड़े चरमपंथियों ने देश के उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद फ्रांसीसी सैन्य हस्तक्षेप शुरू हुआ था।

क्षेत्रीय अल-कायदा सहयोगी जमात नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन और तुआरेग के नेतृत्व वाले अजावाद लिबरेशन फ्रंट ने अप्रैल में देश भर में हमले किए थे, जिनमें रक्षा मंत्री की मौत हो गई थी और बामको के मुख्य हवाई अड्डे को भी निशाना बनाया गया था। हाल के सप्ताहों में जेएनआईएम और आईएसएसपी के बीच भयंकर लड़ाई छिड़ी हुई है।