अमेलिया एनहार्ट की खोज में जुटी टीम नजारा देखकर हैरान
इनका आकार कुत्ते के जितना है
पंजे से नारियल को तोड़ते हैं वे
अत्यंत आक्रामक प्रजाति है यह
निकुमारोरो द्वीपः प्रसिद्ध अमेरिकी महिला पायलट अमेलिया एरहार्ट के 1937 में लापता होने के 87 साल पुराने रहस्य को सुलझाने में जुटी वैज्ञानिकों और खोजकर्ताओं की एक टीम प्रशांत महासागर के एक अत्यंत निर्जन और भयानक द्वीप निकुमारोरो पर पहुंच गई है। यह द्वीप अपनी खास और खौफनाक भौगोलिक स्थिति के साथ-साथ भारी संख्या में पाए जाने वाले विशालकाय कोकोनट क्रैब्स (नारियल केकड़ों) के लिए जाना जाता है।
प्रशांत महासागर के किरिबाती गणराज्य के तहत आने वाले इस छोटे से प्रवाल द्वीप को लंबे समय से अमेलिया एरहार्ट और उनके नेविगेटर फ्रेड नूनन का अंतिम पड़ाव माना जाता रहा है। एक प्रमुख वैज्ञानिक सिद्धांत (कांगो-निकुमारोरो थ्योरी) के अनुसार, 1937 में दुनिया की परिक्रमा करने की अपनी ऐतिहासिक उड़ान के दौरान ईधन खत्म होने पर एरहार्ट का विमान हॉवलैंड द्वीप के बजाय भटककर निकुमारोरो पर क्रैश-लैंड हुआ था।
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इस अभियान में शामिल शोधकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी प्राकृतिक चुनौती इस द्वीप पर फल-फूल रहे विशालकाय कोकोनट क्रैब्स हैं। विशाल आकार व ताकत: कुत्ते के आकार जितने बड़े ये केकड़े दुनिया के सबसे बड़े स्थलीय रीढ़विहीन जीव हैं। इनके पंजों में नारियल को फोड़ने जैसी असाधारण ताकत होती है। सिद्धांत और अवशेष: अतीत में वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययनों से यह अनुमान लगाया गया था कि यदि एरहार्ट इस द्वीप पर दुर्घटनाग्रस्त होकर घायल हुई होंगी या भुखमरी से उनकी मृत्यु हुई होगी, तो इन गंध-संवेदी शिकारी केकड़ों ने उनके अवशेषों को पूरी तरह से क्षत-विक्षत कर दिया होगा। यही कारण है कि दशकों तक वहां मानव कंकाल के केवल कुछ बिखरे हुए हिस्से ही मिल सके थे।
खोज दल आधुनिक तकनीक, ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार, एडवांस डाइविंग सोनार और विशेष सुरक्षा उपकरणों से लैस होकर द्वीप के घने जंगलों और तटीय इलाकों में नए सुराग, विमान के हिस्सों तथा डीएनए नमूनों की तलाश कर रहा है। इस नए अभियान से उम्मीद जताई जा रही है कि विमानन इतिहास के इस सबसे बड़े और डरावने रहस्य पर से आखिरकार पर्दा उठ सकेगा।
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