शीर्ष अदालत ने पूछा बाकी दवाओं का क्या होगा
कीमतों में सत्तर फीसदी कमी होगी
अदालत ने बाकी दवाइयों का पूछ लिया
अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को निर्धारित
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः केंद्र सरकार ने कैंसर के इलाज को आम मरीजों के लिए किफायती बनाने के उद्देश्य से कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य के 30 फीसद पर सीमित (कैप) करने का फैसला किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को इस निर्णय की जानकारी दी।
सरकार के अनुसार, ट्रेड मार्जिन में इस कटौती से कैंसर दवाओं के एमआरपी में 20 फीसद से लेकर 70 प्रतिशत तक की भारी कमी आ सकती है, जिससे देश के कैंसर मरीजों को हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपये की बचत होगी। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने 8 अक्टूबर को आयोजित अपनी बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
हालांकि, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए सवाल उठाया कि ट्रेड मार्जिन की सीमा केवल कैंसर की दवाओं तक ही क्यों सीमित रखी जा रही है, जबकि अन्य जीवन रक्षक दवाओं, मेडिकल डिवाइसेस (उपकरणों) और अस्पताल के उपभोग्य सामग्रियों में भी भारी मुनाफाखोरी का ऐसा ही पैटर्न देखने को मिलता है। सरकार ने खुदरा विक्रेताओं/अस्पतालों को दी जाने वाली आपूर्ति कीमत और मरीज से वसूल की जाने वाली एमआरपी के बीच के विशाल अंतर को कम करने के लिए यह नियम लागू करने का निर्णय लिया है।
केंद्र सरकार के हलफनामे में माना गया है कि कंपनियां अस्पतालों और खुदरा विक्रेताओं को आकर्षित करने के लिए 170 फीसद से 700 फीसद या उससे भी अधिक का ट्रेड मार्जिन ऑफर करती हैं। अस्पताल अक्सर उन दवाओं को प्राथमिकता देते हैं जिन पर सबसे अधिक मार्जिन मिलता है और मरीजों को वे दवाएं पूरी एमआरपी पर बेची जाती हैं।
दस गुना का अंतर: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में एक उदाहरण का जिक्र करते हुए कहा था कि खुदरा विक्रेताओं को जो कैंसर दवा महज 2,700 रुपये में मिलती है, उस पर 27,000 रुपये की एमआरपी छापी जाती है।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है जो 10 से 15 दिनों के भीतर उन दवाओं की सूची सौंपेगी जिन्हें इस नियम के दायरे में लाया जाएगा। यह सूची बाजार की स्थितियों और जनहित के आधार पर समय-समय पर अपडेट की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान दैनिक इस्तेमाल की दवाओं और मेडिकल उपकरणों में चल रही भारी मुनाफाखोरी के कई चौंकाने वाले उदाहरण दिए।
जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि भारत में बने एक कार्डिएक स्टेंट की रिटेलर को सप्लाई कीमत लगभग 5,000 रुपये होती है, लेकिन उस पर एमआरपी 25,000 रुपया अंकित होती है। अगर इस पर 16 फीसद का मार्जिन कैप लगा दिया जाए, तो हृदय रोग के इलाज का खर्च तीन-चौथाई तक कम हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध की है, जिसमें केंद्र सरकार से अन्य दवाओं और उपकरणों पर भी राहत देने को लेकर विस्तृत जवाब मांगा गया है।