ऑरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओँ को सफलता
एक क्रिस्टल की खोज करने में कामयाबी
क्रिस्टल का नाम बीवीआर 19 रखा गया
सूरज की रोशनी से ही सारा काम करेगा
राष्ट्रीय खबर
रांचीः ऑरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी और अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने स्वच्छ ऊर्जा तकनीक के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व मील का पत्थर हासिल किया है। वैज्ञानिकों ने ‘फोटोकैटालिटिक वॉटर स्प्लिटिंग’ (प्रकाशीय जल-विभाजन) तकनीक में बड़ी सफलता प्राप्त करते हुए एक खास क्रिस्टल का विकास किया है, जो आने वाले समय में जीवाश्म ईंधन पर हमारी निर्भरता को पूरी तरह समाप्त करने की क्षमता रखता है।
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शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इस विशेष क्रिस्टल का नाम बीवीआर 19 (BVR 19) है, जो मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (MOF) श्रेणी से संबंधित है और अपनी अनूठी छिद्रयुक्त संरचना के लिए जाना जाता है। पारंपरिक रूप से पानी से हाइड्रोजन को अलग करने की प्रक्रिया यानी ‘इलेक्ट्रोलीसिस’ में भारी मात्रा में बाहरी बिजली की खपत होती है। इसके विपरीत, यह नया क्रिस्टल पूरी तरह से सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा पर निर्भर करता है।
जब इस क्रिस्टल पर सूरज की किरणें पड़ती हैं, तो इसकी जटिल आणविक संरचना प्रकाश ऊर्जा और फोटोन को तेजी से अवशोषित कर लेती है। यह अवशोषित ऊर्जा पानी के अणुओं के मजबूत रासायनिक बंधनों को तोड़ने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण को प्रेरित करती है। इसके परिणामस्वरूप, जल के अणु एक प्राकृतिक रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से शुद्ध हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों में सफलतापूर्वक विभाजित हो जाते हैं।
वर्तमान समय में अधिकांश वाणिज्यिक हाइड्रोजन प्राकृतिक गैस (मिथेन) से तैयार की जाती है, जिसके उत्पादन के दौरान भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। इसके विपरीत, यह नया क्रिस्टल पूरी तरह से शून्य-उत्सर्जन (जीरो-एमिशन) तकनीक पर आधारित है, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने में मददगार साबित होगी।
इसके अलावा, इस तकनीक का सबसे बड़ा आर्थिक लाभ महंगे उत्प्रेरकों (कैटालिस्ट) का विकल्प है। पारंपरिक वॉटर स्प्लिटिंग विधियों में प्लैटिनम या इरिडियम जैसी दुर्लभ और बेहद महंगी धातुओं की आवश्यकता होती है, जिससे लागत बहुत बढ़ जाती है। वैज्ञानिकों ने इस क्रिस्टल की संरचना में धातु के घटकों में बदलाव करके इस बाधा को पार कर लिया है, जिससे उत्पादन लागत में भारी कमी आई है।
यह वैज्ञानिक खोज न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह कई प्रमुख उद्योगों की कायापलट करने के लिए तैयार है। यह आविष्कार स्वच्छ ईंधन-सेल वाहनों के लिए किफायती और सुलभ हाइड्रोजन ईंधन उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही, यह अमोनिया उत्पादन, धातु शोधन और ग्रीन स्टील निर्माण जैसे भारी उद्योगों में हरित क्रांति लाने में भी पूरी तरह सक्षम है, जिससे औद्योगिक प्रदूषण को बड़े पैमाने पर कम किया जा सकेगा।
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