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सुदेश और जयराम के समर्थक हो गये हैं रेस

महतो नेतृत्व की लड़ाई में भाजपा और झामुमो का मजा

दोनों के पास युवा समर्थक मौजूद

कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष ही महतो है

तनातनी के बीच खेमाबदल की उम्मीद कम

राष्ट्रीय खबर

रांचीः झारखंड में महतो का नेता कौन हो, यह टेढ़ी खीर बन गयी है। दरअसल इस स्थिति में एक तरफ आजसू के नेता सुदेश महतो हैं तो दूसरी तरफ पहली बार विधायक  बने जयराम है। दोनों के पास फिलहाल युवाओं की फौज है। शहरी इलाके में बहुत अधिक सक्रियता नहीं दिखाने के बाद भी दोनों के पास रांची और आस पास के जिलों के ग्रामीण इलाकों में व्यापक जनाधार रहा है।

अब दोनों की लड़ाई में भाजपा और झामुमो दोनों को मजा आ रहा है। कई बार इस स्थिति को लेकर बिल्लियों और बंदर की उस कहानी तक की चर्चा हो रही है, जो पंचतंत्र की कहानियों मे से एक है। उस कहानी में दो बिल्लियों के झगड़े में रोटी का बड़ा टुकड़ा बंदर के हाथ लग जाता है। इस खींचतान में कांग्रेस इसलिए शामिल नहीं है क्योंकि खुद प्रदेश अध्यक्ष ही महतो हैं और सिल्ली क्षेत्र से आते हैं।

राजनीतिक गलियारे में कई बार पार्टियों के विलय अथवा समर्थकों के खेमाबदल की कहानी चर्चा में आ जाती है। फिर भी वास्तविकता के धरातल पर ऐसा कुछ होता हुआ नहीं दिखता। ऐसा नहीं है कि भाजपा या झामुमो के पास अपने कुड़मी नेताओं की कमी है। जमशेदपुर मे विद्युत वरण महतो से लेकर धनबाद के मथुरा महतो तक के नेता इस अग्रणी श्रेणी में शामिल है।

लेकिन असली मसला रांची और आस पास का है। यह स्पष्ट है कि पचपरगना के इलाके में महतो वोट की ताकत प्रभावशाली है लिहाजा कोई भी इस वोट बैंक को अपने पाले में करना चाहेगा, यह सामान्य राजनीति है। अब सुदेश महतो की परेशानी उनके पूर्व सहयोगी हिमांशु ने बढ़ा दी है। लगातार सोशल मीडिया पर अलग अलग तस्वीर और जानकारी सार्वजनिक कर उन्होंने आजसू की इस ताकत को कम कर दिया है। दूसरी तरफ जयराम महतो अपने आक्रामक अंदाज की वजह से राजनीति में भले ही लोकप्रिय हों लेकिन यह आदत पटखनी खाने का कारण भी बन सकती है।

वोट बैंक का एक बड़ा विषय आदिवासी वोट भी हैं पर अर्जुन मुंडा की प्रदेश स्तर पर कम सक्रियता की वजह से आदिवासी वोट अब भी भाजपा से छिटका हुआ है। यह अलगाव रघुवर दास के शासनकाल में ही हुआ था और किसी और नेता ने इस घाव पर मरहम लगाने की कोशिश तक नहीं की। कुल मिलाकर अभी एक रोचक स्थिति बनी है पर लगता नहीं है कि आमने सामने खड़े दोनों नेता आसानी से किसी तीसरी ताकत के आगे हथियार डाल देंगे।\