डार्बिया शिपिलोवा की मां ने नया सवाल खड़ा कर दिया
यह चर्चा सिर्फ अनजान लोग कर रहे हैं
वह खुद भी एक चिकित्सा पेशेवर हैं
लैब के टेस्ट ट्यूब मजबूत होते हैं
मॉस्कोः पिछले सप्ताह संदिग्ध प्लेग के संक्रमण से जान गंवाने वाली एक रूसी प्रयोगशाला (लैब) कर्मी की मां ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें यह कहा जा रहा था कि उनकी बेटी की मौत किसी टूटी हुई टेस्ट ट्यूब के जरिए संक्रमण फैलने से हुई थी। स्थानीय मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, ऐसी बात सिर्फ कोई शौकिया या नासमझ इंसान ही कह सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, रूसी समाचार आउटलेट ग्लुबिना से बातचीत करते हुए खुद एक चिकित्सा पेशेवर (मेडिकल प्रोफेशनल) मां स्वेतलाना शिपिलोवा ने अपनी 28 वर्षीय दिवंगत बेटी डार्विया शिपिलोवा के बारे में कहा, मैं सच्चाई जानती हूं। मुझे उन मूर्ख परिचितों को जवाब देना पड़ रहा है जिन्होंने इन बातों पर विश्वास कर लिया—बेशक, समझदार लोगों ने इस पर बिल्कुल यकीन नहीं किया।
हालांकि स्वेतलाना शिपिलोवा ने यह खुलकर नहीं बताया कि उनकी बेटी की मौत आखिर कैसे हुई या वह कैसे संक्रमित हुई थीं, लेकिन उन्होंने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया कि प्लेग के बैक्टीरिया किसी दुर्घटना में टेस्ट ट्यूब से बाहर आ गए थे। उन्होंने तर्क दिया कि प्रयोगशाला के कांच के उपकरण उतने कमजोर नहीं होते जितना लोग सोचते हैं।
उन्होंने कहा, आप चाहें उसे दीवार पर भी दे मारें, फिर भी वह इतनी आसानी से नहीं टूटती। केवल कोई शौकिया व्यक्ति ही ऐसा दावा कर सकता है। अगर हम काल्पनिक रूप से भी सोचें, तो भी आप अंदर की सामग्री को बाहर नहीं गिरा सकते या ट्यूब को नहीं तोड़ सकते—वे इतनी सुरक्षित होती हैं। उन्होंने आगे आरोप लगाते हुए कहा, उन्होंने बस मेरी बेटी को मरने दिया।
दूसरी ओर, क्रेमलिन (रूसी सरकार) ने इस पूरे मामले को दबाने या कम करके दिखाने की कोशिश की है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि महिला की मौत अज्ञात कारणों से हुए निमोनिया के कारण हुई थी और व्यापक जांच के बाद ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि यह उन रोगजनकों (पैथोजन्स) के कारण हुआ था जिन पर वह काम करती थी। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और पूरी पारदर्शिता बरतने की मांग पर जोर दिया है, जिससे इस रहस्यमय मौत पर से पर्दा उठ सके।