दक्षिण अफ्रीका मेंचंद दिनों की शांति के बाद फिर हिंसा
वहां पहले से ही इसका विरोध जारी
अब तक चौबीस वाहन जलाये गये
विदेशियों की दुकानों को लूटा गया
जोहांसबर्गः दक्षिण अफ्रीका के दो प्रमुख आर्थिक और औद्योगिक केंद्रों—जोहान्सबर्ग और डरबन—में अप्रवासी विरोधी प्रदर्शनों के हिंसक रूप लेने के बाद कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन हिंसक प्रदर्शनों और उपद्रव के दौरान कम से कम 24 वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया, जबकि विदेशी नागरिकों की कई दुकानों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर लूटपाट की गई।
यह अशांति और हिंसा मुख्य रूप से गुरुवार को देश के सबसे बड़े शहर जोहान्सबर्ग के बाहरी इलाके में स्थित एक विशाल टाउनशिप ‘सोवेटो’ और पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाह शहर ‘डरबन’ में अचानक भड़क उठी। इस अचानक हुए उपद्रव के पीछे एक अदालत के उस फैसले को लेकर स्थानीय नागरिकों में पनप रहा गहरा रोष मुख्य कारण बताया जा रहा है, जिसमें हाल ही में यह व्यवस्था दी गई थी कि कुछ ऐसे अप्रवासी, जो अवैध रूप से देश में दाखिल हुए थे, वे भी शरण के लिए आधिकारिक तौर पर आवेदन करने के पात्र हैं।
इस अदालती फैसले के तुरंत बाद देश भर के आव्रजन केंद्रों के बाहर शरण चाहने वाले लोगों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं, जिससे स्थानीय आबादी में यह चिंता और आक्रोश फैल गया कि इससे सार्वजनिक सुरक्षा और व्यवस्था पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। दक्षिण अफ्रीका का इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि यहाँ समय-समय पर ज़ेनोफोबिक (विदेशी प्रवासियों के प्रति द्वेष और शत्रुता) हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिनमें अक्सर पड़ोसी अफ्रीकी देशों से आए प्रवासियों को निशाना बनाया जाता रहा है।
डरबन में स्थिति तब पूरी तरह बेकाबू हो गई जब एक स्थानीय प्रदर्शनकारी पर किसी विदेशी नागरिक द्वारा हमला किए जाने के आरोप सामने आए। इस कथित हमले की खबर फैलते ही विरोध प्रदर्शन हिंसक झड़पों में बदल गया। स्थिति को नियंत्रित करने और उग्र भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को अंततः रबर की गोलियों का सहारा लेना पड़ा।
पुलिस ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि कुल 24 जलाए गए वाहनों में से 14 वाहन अकेले डरबन शहर में आग की भेंट चढ़े, जबकि 10 वाहन सोवेटो में जलाए गए। सोवेटो के ‘ओरलैंडो वेस्ट’ नामक मोहल्ले में स्थानीय निवासी बड़ी संख्या में एकत्र हुए थे और उन्होंने विदेशी नागरिकों द्वारा संचालित की जाने वाली छोटी खुदरा दुकानों (जिन्हें स्थानीय स्तर पर ‘स्पाज़ा शॉप्स’ कहा जाता है) को तुरंत बंद कराने की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनों के दौरान स्थानीय निवासियों और विदेशी दुकानदारों के बीच तीखी झड़पें हुईं, और इस दौरान कई जगहों पर गोली चलने की आवाजें भी सुनी गईं।
हालाँकि, स्थानीय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी सोखोलानी फिला ने सरकारी प्रसारक को दिए गए अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि इस हिंसा में फिलहाल किसी के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। हिंसा के इस तांडव को रोकने और शांति बहाल करने के लिए पुलिस प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में भारी संख्या में अतिरिक्त सुरक्षा बलों और पुलिस टुकड़ियों को तैनात कर दिया है। कार्यवाहक राष्ट्रीय पुलिस कमिश्नर लेफ्टिनेंट जनरल पुलेंग डिम्पैन ने सार्वजनिक और निजी संपत्ति के इस तरह बड़े पैमाने पर हुए विनाश की कड़े शब्दों में निंदा की है। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि इस अराजकता और तोड़फोड़ के पीछे जो भी लोग या तत्व शामिल हैं, उनके खिलाफ कानून के तहत बेहद सख्त कार्रवाई की जाएगी।