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भारतीय नागरिक का नाजी जैसा आचरण पकड़ा गया

फ्रांस की अदालत ने 20 साल की सजा दी

एक गुप्त समूह चलाता था वह

नाजी विचारधारा से प्रभावित है

पढ़ने गया था और कोच बना

पेरिसः फ्रांस की राजधानी पेरिस की एक विशेष अदालत ने हाल ही में एक सनसनीखेज फैसले के तहत 29 वर्षीय भारतीय युवक रोहन राने को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियोजन पक्ष ने आरोपी के लिए 30 साल की सजा की मांग की थी। रोहन राने एक ऐसे कुख्यात और खतरनाक संगठन का नेतृत्व कर रहा था, जो मुख्य रूप से कम उम्र की मासूम लड़कियों को अपने जाल में फंसाकर उन्हें विभिन्न प्रकार के अमानवीय यौन कृत्यों के लिए मजबूर करता था। जांच में यह बात सामने आई कि इस गिरोह के भीतर पीड़ितों के साथ अमानवीय क्रूरता, यातना और प्रताड़ना की सभी हदें पार कर दी गईं, जिससे समाज में भारी रोष व्याप्त है।

अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के अनुसार, रोहन राने पूरी तरह से नाजी विचारधारा से अत्यधिक प्रभावित था और वह अपने भीतर छिपी कुंठा तथा हिंसक प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहा था। उसके द्वारा संचालित इस संगठित गिरोह के अधिकांश पीड़ित अमेरिका की कम उम्र की लड़कियां थीं, जिनमें से कई की आयु तो 15 वर्ष से भी कम थी। इसके अलावा, इस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय मस्कुलिनिस्ट समूह के अन्य पुरुष सदस्य भारत, अमेरिका, जर्मनी और न्यूजीलैंड जैसे विभिन्न देशों से ताल्लुक रखते थे। शुरुआती दौर में इस मामले से जुड़े कई पीड़ितों की पहचान की गई, जिनमें से छह पीड़िताओं ने हिम्मत जुटाकर अदालत में औपचारिक और गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं। पांच दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद, जो ज्यादातर बंद कमरों में हुई, अदालत ने रोहन राने को संगठित गिरोह के माध्यम से जबरन वसूली, क्रूरतापूर्ण अत्याचार और मानवाधिकारों के हनन जैसे गंभीर अपराधों में पूरी तरह दोषी पाया।

अभियोजन पक्ष की ओर से यह भी खुलासा किया गया कि सीवीएलटी  नामक इस समूह की कार्यप्रणाली बेहद खौफनाक थी। यह संगठन मुख्य रूप से उग्र नस्लवाद, नाजी सौंदर्यशास्त्र, यहूदी विरोध (एंटीसेमिटिज्म) और नारीवादियों तथा उभयलिंगी समुदाय के प्रति गहरी घृणा की भावना से प्रेरित था। कोविड-19 महामारी के शुरू होने से ठीक पहले यह गिरोह डिस्कॉर्ड प्लेटफॉर्म पर अत्यधिक सक्रिय हुआ और रोहन राने इसका मुख्य संचालक व मास्टरमाइंड था। शुरुआती जीवन में राने फ्रांस के एंटीब्स शहर में एक कमर्शियल स्कूल से पढ़ाई करने गया था, लेकिन बाद में वह स्पोर्ट्स कोच के रूप में अपनी गतिविधियां चलाने लगा।

ऑनलाइन मंचों और विभिन्न डिजिटल फोरम के माध्यम से यह गिरोह विशेष रूप से कमजोर और मानसिक रूप से संवेदनशील लड़कियों को अपना निशाना बनाता था। जालसाजी और चालाकी से उनकी नग्न तस्वीरें हासिल करने के बाद, आरोपी उन्हें ब्लैकमेल करते थे और मांगें पूरी न करने पर उनकी तस्वीरें व जानकारियां उनके परिवारों और स्कूल के दोस्तों तक पहुंचाने की धमकी देते थे। जांचकर्ताओं के अनुसार, कई पीड़ित लड़कियां अश्वेत या यहूदी समुदाय से थीं, जिन्हें जबरन यौन गतिविधियों में शामिल होने और अपने ही शरीर पर चाकू से गहरे जख्म देने के लिए प्रताड़ित किया जाता था। पीड़ित लड़कियों को अपने प्रताड़कों के नाम या फिर नाजी स्वास्तिक के निशान तक अपनी त्वचा पर कुरेदने के लिए मजबूर किया जाता था। इस दौरान आरोपी खुद को वॉर लॉर्ड कहकर पुकारते थे और बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां करते थे। अंततः अमेरिकी खुफिया व सुरक्षा अधिकारियों से साझा की गई महत्वपूर्ण जानकारियों के आधार पर फ्रांसीसी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 2021 में रोहन राने को पहली बार गिरफ्तार किया था, जिसके बाद अब जाकर अदालत ने इस मामले में ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है।