चुनाव आयोग के साफ्टवेयर का खेल और स्पष्ट हो गया
एक नाम जुड़ा तो छह काटे गये
किसने इसके फॉर्म जमा किये
जांच में बंगाल का राज भी खुला
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: एक हालिया डेटा विश्लेषण से यह सामने आया है कि दिल्ली में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर रखने का सिलसिला तेजी से चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, चल रहे दावे और आपत्तियों के चरण के दौरान दिल्ली की मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए जमा किए गए हर एक फॉर्म 6 के मुकाबले, नाम पर आपत्ति जताने या सूची से नाम हटाने वाले लगभग छह फॉर्म 7 आवेदनों का निपटारा कर दिया गया है।
रिपोर्ट में पाया गया है कि 31 अगस्त से 4 अक्टूबर के बीच केवल 569 फॉर्म 6 आवेदनों का निपटारा किया गया, जबकि इसी पांच सप्ताह की अवधि के दौरान कुल 3,209 फॉर्म 7 आवेदनों को मंजूरी दे दी गई। यह आंकड़े साप्ताहिक निर्वाचन क्षेत्र-वार फॉर्म निस्तारण रिपोर्ट पर आधारित हैं। रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि 16 जून से और 31 अगस्त को दावे और आपत्तियों की अवधि शुरू होने से पहले ही 2.12 लाख फॉर्म 6 और 51,747 फॉर्म 7 आवेदन जमा किए जा चुके थे।
यानी जितने नाम जोड़े गये उससे छह गुणा ज्यादा नाम काटने के फॉर्म जमा हुए। आपको बता दें कि फॉर्म 6 का उपयोग अंतिम एसआईआर सूचियों में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है, जबकि फॉर्म 7 का उपयोग मतदाताओं द्वारा किसी अन्य मतदाता के नाम पर आपत्ति जताने या सूची से उसका नाम हटाने की मांग करने के लिए किया जाता है।
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल के मामले में एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट को सौंपे गए निर्वाचन क्षेत्र-स्तरीय आंकड़ों से पता चला है कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से नाम हटाने के आवेदन पर निर्णय होने की संभावना, नाम शामिल करने वाले आवेदन की तुलना में दोगुनी से भी अधिक थी।