वहां की मिट्टी में मिला चुंबकीय टाइम कैप्सूल
यह प्राचीन संरचना की जानकारी देता है
कांच जैसी सामग्री के भीतर नैनोकण मिले
वहां के खनिजों की जानकारी मिलती है
राष्ट्रीय खबर
रांचीः चंद्रमा अब वैश्विक स्तर पर कोई चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न नहीं करता है, लेकिन इसके प्राचीन चुंबकत्व के अवशेष आज भी चंद्र चट्टानों और मिट्टी के भीतर सुरक्षित हैं। इन सामग्रियों में संरक्षित चुंबकीय खनिजों का अध्ययन करके, वैज्ञानिक यह पुनर्रचना कर सकते हैं कि समय के साथ चंद्रमा का चुंबकीय वातावरण कैसे बदला।
चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के अंतर्गत हेफेई इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल साइंस की हाई मैग्नेटिक फील्ड लेबोरेटरी के प्रोफेसर हाइफेंग डू के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने चेंग-6 की चंद्र मिट्टी से लिए गए इम्पैक्ट ग्लास के अंदर धात्विक लोहे का विश्लेषण करते हुए पहली बार प्राकृतिक चंद्र नमूनों में फेस-सेंटर क्यूबिक गामा-एफई की पहचान की है। यह अध्ययन प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित हुआ है।
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डॉ. लोंग ली ने बताया कि यह नन्हा चुंबकीय जीवाश्म चंद्रमा के प्राचीन चुंबकीय इतिहास को बेहतर ढंग से समझने में हमारी मदद कर सकता है। नमूनों की जांच के लिए, शोधकर्ताओं ने फोकस्ड आयन बीम तैयारी, ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी और रासायनिक विश्लेषण का उपयोग किया। इन तकनीकों से कांच जैसी सामग्री के भीतर अनगिनत नैनोस्केल लोहे के कण एंबेडेड पाए गए।
बारीकी से जांच करने पर पता चला कि कुछ कणों में फेस-सेंटर क्यूबिक गामा-एफई शामिल था। वास्तव में, अध्ययन किए गए दोनों इम्पैक्ट-ग्लॉस नमूनों में गामा-एफई लोहे का प्रमुख रूप था। सामान्य परिस्थितियों में, गामा-एफई केवल उच्च तापमान पर ही स्थिर रहता है। जैसे-जैसे सामग्री ठंडी होती है, यह आमतौर पर अल्फा-एफई के रूप में बदल जाती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि चंद्रमा पर उल्कापिंडों के प्रभाव से उत्पन्न होने वाली असामान्य परिस्थितियां गामा-एफई को चंद्र सतह पर जीवित रहने में सक्षम बना सकती हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि कार्बन और अन्य तत्वों की थोड़ी मात्रा, प्रभाव के दौरान बनने वाले पिघले हुए पदार्थ का तेजी से ठंडा होना और आसपास के कांच जैसे मैट्रिक्स से सुरक्षा, यह सभी संरचना को स्थिर रखने में मदद कर सकते हैं।
शोध दल ने व्यक्तिगत गामा-एफई नैनोकणों के चुंबकीय व्यवहार की जांच के लिए ऑफ-एक्सिस इलेक्ट्रॉन होलोग्राफी का भी उपयोग किया। उन्होंने पाया कि अपेक्षाकृत बड़े गामा-एफई कण एक स्थिर सिंगल-वोरटेक्स चुंबकीय अवस्था बना सकते हैं। बाहरी चुंबकीय क्षेत्र के संपर्क में आने पर ये कण एक समान चुंबकीय प्रतिक्रिया भी बनाए रखते हैं।
यह स्थिरता दर्शाती है कि गामा-एफई चंद्र सामग्री में चुंबकीय जानकारी के एक अज्ञात रिकॉर्डर के रूप में कार्य कर सकता है, जो चंद्रमा के अतीत के दौरान मौजूद स्थितियों के सुराग को संरक्षित करता है।
इस खोज से चंद्र नमूनों में पाए जाने वाले चुंबकीय खनिजों की विविधता का दायरा बढ़ जाता है। चूंकि गामा-एफई और अल्फा-एफई अलग-अलग स्थितियों में बनते हैं और चुंबकीय रूप से अलग व्यवहार करते हैं, इसलिए प्रत्येक चंद्र प्रभाव घटनाओं के अलग-अलग चरणों की जानकारी दर्ज कर सकता है। भविष्य के अनुसंधान से यह निर्धारित करना होगा कि ये खनिज चंद्रमा के प्राचीन चुंबकीय क्षेत्र और समय के साथ इसके विकास के बारे में कितनी सटीक जानकारी दे सकते हैं।
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