ईसीआईनेट पोर्टल पर सुधार के नए विकल्प का असर दिखा
दिल्ली में साफ्टवेयर का लॉक खुला
साबित हुआ कि पहले इसपर रोक थी
अब बिना दस्तावेज के ही काम हो रहा
राष्ट्रीय खबर
नयी दिल्ली: निर्वाचन आयोग के ईसीआईनेट पोर्टल पर नए विकल्प जोड़े गए हैं, जिनकी मदद से दिल्ली के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) अब किसी मतदाता के खिलाफ जारी नोटिस का निपटारा बिना दस्तावेज मांगे या सुनवाई (हियरिंग) आयोजित किए ही उन्हें पात्र के रूप में चिह्नित कर सकते हैं। यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब कई राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए चुनाव अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ईसीआईनेट के कामकाज के केंद्रीयकरण को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे।
सूत्रों के मुताबिक, पोर्टल पर एक नया डायलॉग बॉक्स जोड़ा गया है, जो ईआरओs को बिना कोई सुनवाई तय किए या दस्तावेज मांगे बिना अंतिम मतदाता सूची के लिए मतदाताओं को मंजूरी देने की सुविधा देता है। यह नया विकल्प 30 सितंबर से पहले उपलब्ध नहीं था। अब इसके जरिए ईआरओ किसी मतदाता को बिना सुनवाई तय किए या बिना दस्तावेजों के अंतिम सूची के लिए पात्र घोषित कर सकते हैं।
हालांकि, दोनों ही मामलों में ईआरओ के लिए एक अनिवार्य सुनवाई आदेश—यानी एक घोषणापत्र अपलोड करना जरूरी है, जिसमें यह पुष्टि करनी होगी कि वे मतदाता की पात्रता से संतुष्ट हैं और उन्होंने सत्यापन पूरा कर लिया है। मतदाता सूची तैयार करने में ईआरओs के पास अंतिम अधिकार होता है और वे सभी दावों तथा आपत्तियों पर फैसला लेते हैं। विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों के अधिकारियों ने कहा कि ये विकल्प 31 अगस्त को नोटिस चरण की शुरुआत से ही उपलब्ध होने चाहिए थे।
पहले, केवल नाम हटाने या किसी मतदाता को अपात्र घोषित करने वाले मामलों में ही सुनवाई आदेश अपलोड करना अनिवार्य था। नोटिस और सुनवाई के बाद किसी मतदाता को अंतिम सूची में शामिल करने की प्रक्रिया में BLO, ईआरओ और नो-मैपिंग मामलों में जिला निर्वाचन अधिकारी शामिल होते थे। नए विकल्प इस प्रक्रिया को बदलते हैं। ईआरओs अब बिना दस्तावेज अपलोड किए और कुछ मामलों में बिना सुनवाई तय किए भी मतदाता को अंतिम सूची में जगह दे सकते हैं।