गांधी के देश में अब गांधीवादी प्रदर्शन को भी रोक रही सरकार
छात्रों पर बल प्रयोग की निंदा की
महात्मा गांधी ने हमें यही सीख दी
ज्ञानेश कुमार को कुर्सी छोड़ना होगा
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः गांधी जयंती के अवसर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। यह पूरा मामला उस समय तूल पकड़ा जब दिल्ली में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा निष्पक्ष चुनावों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाई जा रही थी।
हाल ही में, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तीखी टिप्पणी करते हुए पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि देश के युवा वोट चोरी और चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि, इसके जवाब में मोदी-शाह सरकार ने प्रदर्शनकारी लड़के-लड़कियों को सड़कों पर घसीटा और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि महात्मा गांधी ने हमेशा सच बोलने और शांति के मार्ग पर चलकर लड़ने का पाठ पढ़ाया है, और आज सरकार इसी वैचारिक शक्ति से सबसे ज्यादा भयभीत है।
विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं का यह भी कहना है कि मौजूदा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसे संचालित करने वाली व्यवस्था पर जनता का भरोसा धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। यही वजह है कि जब तक चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर उठ रहे बुनियादी सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिल जाते, तब तक जनता का रोष शांत होने वाला नहीं है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लोकतांत्रिक संस्थानों की स्वायत्तता पर लगातार प्रहार किया जा रहा है, जिसे देश के जागरूक नागरिक और युवा कदापि सहन नहीं करेंगे।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की दमनकारी नीतियां और पुलिस बल का प्रयोग करके जनआंदोलनों को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता। जब तक नागरिकों के मन में प्रणाली की निष्पक्षता को लेकर संशय बना रहेगा, तब तक विरोध के स्वर किसी न किसी रूप में मुखर होते रहेंगे। अंततः सत्ताधीशों को इन जायसवाल और मांगों का सामना करना ही होगा, क्योंकि दमन से भले ही कुछ समय के लिए भीड़ को तितर-बितर किया जा सकता है, लेकिन व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल हमेशा अपनी जगह पर कायम रहते हैं।