चिकित्सा विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का नया योगदान
मात्र 22 घंटे में यह काम पूरा किया
साढ़े नौ सौ ए आई एजेंटों का प्रयोग
कुछ नई चीजों की पहचान भी कर ली
राष्ट्रीय खबर
रांचीः कृत्रिम बुद्धिमत्ता विज्ञान के खास तौर पर चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में बहुत मददगार साबित हो रहा है। इसी क्रम में अब वैज्ञानिक अनुसंधान और जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक) के इतिहास में एक अभूतपूर्व मील का पत्थर स्थापित करते हुए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल क्लाउड ने मात्र 21 से 22 घंटों के भीतर एक बिल्कुल नए जीन-एडिटिंग एंजाइम सिस्टम की खोज की है। एंथ्रोपिक कंपनी द्वारा संचालित इस प्रोजेक्ट में लगभग 950 स्वायत्त एआई एजेंटों के एक समूह का उपयोग किया गया था।
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पारंपरिक जैव-सूचना विज्ञान और प्रयोगशाला पद्धतियों में इस तरह की जटिल जैविक संरचनाओं का पता लगाने में महीनों या वर्षों का समय लग जाता है, क्योंकि शोधकर्ताओं को विशाल डेटाबेस से मैनुअल रूप से डेटा छानना पड़ता है। इसके विपरीत, इस अभूतपूर्व प्रक्रिया में एआई एजेंटों ने सामूहिक रूप से लगभग 21 करोड़ टोकन्स को प्रोसेस किया और दुनिया भर के डिजिटल डेटाबेस में मौजूद दो लाख से अधिक डीएनए अनुक्रमों तथा रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज का गहन विश्लेषण किया।
इस तीव्र कंप्यूटेशनल विश्लेषण के दौरान, एआई ने बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरसों (बैक्टीरियोफेज) के भीतर एक असामान्य और छिपी हुई गैर-कोडिंग रिपीट एरे तथा एक सहायक प्रोटीन की पहचान की। यह संरचना काफी हद तक लोकप्रिय क्रिसपर तकनीक जैसी प्रणाली से मिलती-जुलती है, जिसे पहले के पारंपरिक अध्ययन नजरअंदाज कर चुके थे।
इस खोज का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एआई ने केवल स्थिर संरचनाओं की भविष्यवाणी (जैसे अल्फाफोल्ड द्वारा प्रोटीन फोल्डिंग) करने के बजाय, एक स्वतंत्र बायोइन्फमैटिशियन की तरह काम किया। इसने जैविक विसंगतियों को खुद चिन्हित किया, संभावित लीड्स को छांटा और सैन फ्रांसिस्को स्थित एंथ्रोपिक की अपनी प्रयोगात्मक वेट लैब के मानव वैज्ञानिकों के सामने एक पूरी तरह से तैयार सैद्धांतिक और प्रायोगिक तंत्र पेश किया।
प्रसिद्ध क्रिसपर पायनियर और एमआईटी के प्रोफेसर फेंग झांग ने इस सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे स्वायत्त एआई एजेंटों द्वारा प्रत्यक्ष जैविक खोज का एक आकर्षक उदाहरण बताया है। हालांकि इस जैविक प्रणाली की कार्यप्रणाली पर अभी और अधिक शोध और भौतिक सत्यापन की आवश्यकता है, फिर भी इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि भविष्य में आनुवंशिक रोगों के इलाज, जीन थेरेपी और सटीक चिकित्सा के क्षेत्र में एआई की भूमिका क्रांतिकारी होने वाली है।
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