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बॉंबे हाईकोर्ट के बाद अब शीर्ष अदालत में भी शिकायत

ज्ञानेश कुमार पर मुकदमा चलाने की मांग

मामले की एसआईटी जांच करायें

पूर्व के फैसलों को अवैध घोषित करें

दो आयुक्तों की सहमति नहीं थी इनमें

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: चुनाव आयोग में निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद के बीच, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। आयोग के मुख्य निर्णयों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर यह याचिका दाखिल की गई है। कई दिनों से जारी विवाद के बीच किसी चुनाव आयुक्त ने प्रेस के सामने आकर अब तक इन विषयों पर कुछ नहीं कहा है।

अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर इस जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई अहम फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए हैं। याचिका में मांग की गई है कि ज्ञानेश कुमार द्वारा अन्य आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए निर्णयों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों को असंवैधानिक और शून्य घोषित किया जाए।

इसके साथ ही, याचिका में उन सभी फैसलों को अवैध करार देने और मूल फॉर्म 6 को बहाल करने की मांग की गई है। याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम कैसे हटाए गए, इसकी जांच एक विशेष जांच दल से कराई जाए।

याचिका में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कर्तव्य में कथित लापरवाही को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और महानिदेशक (आईटी) सीमा खन्ना के खिलाफ अभियोजन (प्रॉसिक्यूशन) शुरू करने की भी मांग की गई है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में यह सामने आने के बाद से ज्ञानेश कुमार आलोचनाओं के घेरे में हैं कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण सहित अन्य मुद्दों पर अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया जा रहा था।