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विनोवा भावे विश्वविद्यालय भी नया रिकार्ड बना रहा है

एक लाख से अधिक कॉपियां योगदा कॉलेज में

नियम के खिलाफ सारा काम हो रहा

शिक्षक अपने घर पर जांच रहे कॉपी

असली कारण एक गेस्ट फैकल्टी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः हजारीबाग के विनोवा भावे विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग ने हजारीबाग के अलावा रांची के भी शिक्षाविदों को हैरान कर दिया है। वहां के सेमेस्टर सात की तीनों संकायों की कॉपियों को जांच के लिए रांची के योगदा सत्संग महाविद्यालय में भेज दिया गया है। हैरानी इस बात की है कि जिस कॉलेज के पास अपने कर्मचारियों और प्राध्यापकों की कमी है, उसे कॉपी जांचने के लायक कैसे समझा गया।

मामले की जानकारी मिलने के बाद जब उसकी जांच की गयी तो पता चला कि अभी से करीब डेढ़ माह पहले ही विश्वविद्यालय ने यह फैसला लिया था। दूसरी तरफ रांची विश्वविद्यालय के अनुभवी और जानकार बताते हैं कि दरअसल ऐसी व्यवस्था पहले कभी नहीं रही कि किसी विश्वविद्यालय के साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स की सारी कॉपियों को किसी एक ही कॉलेज में भेज दिया जाए। कुछ विशेषज्ञ इस बात को भी गलत मानते हैं कि विश्वविद्यालय के अपने कॉलेज होने के बाद भी बाहर के किसी अल्पसंख्यक मान्यता प्राप्त कॉलेज को कॉपी जांच के लिए भेजने की पहले कोई परंपरा भी नहीं रही है।

इतनी जानकारी के बाद जब मामले को और कुरेदा गया तो यह पता चला कि कम स्टाफ और प्रोफसरों वाले इस योगदा महाविद्यालय में हालत यह है कि वहां कॉपियों को एक स्टोर रूम में रखा गया है। मामले की तहकीकात से यह भी पता चला कि वहां कार्यरत शिक्षक कॉपियों का बंडल अपने घर ले जा रहे हैं। नियम के मुताबिक यह नियम विरूद्ध कार्य है और विश्वविद्यालय में जांचने वाली कॉपियों को बाहर ले जाने का कोई प्रावधान नहीं है। एक जानकार ने बताया कि कॉलेज में असुविधा का हवाला देकर एक प्रोफसर करीब दस हजार कॉपियां अपने घर पर जांच रही है।

ऐसे क्यों हुआ के सवाल का उत्तर यह मिला कि योगदा कॉलेज में के गणित विभाग में कार्यरत एक गेस्ट फैकल्टी पहले विनोवा भावे विश्वविद्यालय में कार्यरत थे। उनकी जान पहचान और पैरवी की वजह से हजारीबाग मुख्यालय के विश्वविद्यालय की कॉपियों को यहां जांच के लिए भेजा गया है।