राष्ट्रीय राजनीतिक सरगर्मी के बीच गोवा में नया समीकरण
भाजपा और कांग्रेस से अलग है
तीसरा मोर्चा खड़ा करने की कोशिश
दोनों दलों के प्रमुख मौजूद थे वहां
राष्ट्रीय खबर
मुंबईः आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर आम आदमी पार्टी (आप) और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) ने गोवा फर्स्ट के नारे के तहत एक नए राजनीतिक गठबंधन की आधिकारिक घोषणा कर दी है। पणजी में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और जीएफपी के अध्यक्ष व विधायक विजय सरदेसाई ने इस गठबंधन को राज्य में भाजपा और कांग्रेस दोनों के एक सशक्त और ईमानदार विकल्प के रूप में पेश किया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अरविंद केजरीवाल ने पिछली राजनीतिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में भाजपा से त्रस्त होकर जनता ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया था, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस ने अपने विधायकों को भेजकर अंततः भाजपा की सरकार बनवाने में मदद की। यही स्थिति वर्ष 2022 के चुनावों में भी दोहराई गई, जहां जनता ने एक बार फिर भाजपा के खिलाफ वोट दिया, लेकिन कांग्रेस की आंतरिक विफलताओं ने फिर से भाजपा को सत्ता में ला खड़ा किया। केजरीवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गोवा की जनता अब तीसरी बार इस तरह के राजनीतिक धोखे को बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल नहीं है और राज्य की आवाम अब एक सच्चा विकल्प चाहती है।
राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो वर्ष 2017 के 40 सदस्यीय गोवा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस 17 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, लेकिन भाजपा ने निर्दलियों और जीएफपी जैसे छोटे दलों का समर्थन जुटाकर सरकार बना ली थी। कार्यकाल पूरा होने से पहले ही कांग्रेस के सभी 15 विधायक पाला बदल कर अलग हो गए थे। इसके बाद 2022 के चुनावों में कांग्रेस ने जीएफपी के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा था और अपने दम पर 11 सीटें जीती थीं, जिनमें से 8 विधायक बाद में भाजपा में शामिल हो गए। इसके विपरीत, जीएफपी के एकमात्र विधायक विजय सरदेसाई और ‘आप’ के दोनों विधायक अपनी पार्टियों के प्रति पूरी तरह वफादार बने रहे।
जीएफपी प्रमुख विजय सरदेसाई ने इस मौके पर कहा कि यह नया गठबंधन बिना किसी विचारधारा वाली और दलबदलुओं से भरी सरकार के खिलाफ एक स्पष्ट विकल्प है। उन्होंने गोवा को दीमक की तरह चाट रही समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार, अंधाधुंध भू-रूपांतरण (लैंड कन्वर्जन), कोयला प्रदूषण, पर्यावरण का विनाश, बेरोजगारी और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसी तमाम गंभीर समस्याओं की मुख्य जड़ राजनीतिक दलबदल ही है, जिसे अब और सहन नहीं किया जाएगा।