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भारतीय शिक्षा व्यवस्था निराश कर रही हैः राहुल गांधी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक तौर पर आलोचना की

व्यवस्था पर से भरोसा उठना प्रमाण है

सभी से अनुभव सांझा करने की अपील की

इंदौर में आगामी 19 को छात्रों की गूंज

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को एक तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था उस युवा पीढ़ी को पूरी तरह विफल कर रही है, जिसे सशक्त बनाने के लिए इसकी संरचना की गई थी। उन्होंने देश के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से खुलकर आगे आने तथा यह साझा करने का आह्वान किया कि आखिर उनका इस व्यवस्था से विश्वास क्यों उठता जा रहा है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली उन लाखों युवाओं को नाउम्मीद कर रही है जो पूरी ईमानदारी के साथ अपना भविष्य संवारने में जुटे हैं। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र की जमीनी सच्चाइयों और बदहाली को उजागर करते हुए पेपर लीक जैसी गंभीर व्यवस्थागत धांधलियों, आसमान छूती फीस और देश भर में जर्जर हो चुके शैक्षिक बुनियादी ढांचे पर गहरा रोष व्यक्त किया। उनका मानना है कि इन तमाम मोर्चों पर नाकामी के चलते आज का युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।

व्यवस्था में सुधार लाने के लिए राहुल गांधी ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने अनुभव, ठोस सबूत और मूल्यवान सुझाव साझा करने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समस्या की तह तक पहुंचने और वास्तविक समाधान खोजने के लिए इन स्टेकहोल्डर्स की आवाज सुनना बेहद जरूरी है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सामूहिक प्रयासों से ही शिक्षा व्यवस्था में एक बार फिर से उम्मीद और भरोसे को वापस लाया जा सकता है।

यह तीखी प्रतिक्रिया राहुल गांधी की लोकप्रिय पहल छात्रों की गूंज के आगामी पांचवें संस्करण से ठीक पहले सामने आई है, जिसका आयोजन आगामी 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में प्रस्तावित है। कांग्रेस नेता का मानना है कि देश भर के युवाओं और विद्यार्थियों की समस्याओं को सीधे तौर पर सुने बिना शिक्षा प्रणाली में कोई भी सार्थक और सकारात्मक बदलाव संभव नहीं है।

गौरतलब है कि इस अभियान के तहत राहुल गांधी अब तक कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे जैसे प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में इसके चार सफल संस्करण आयोजित कर चुके हैं। पुणे में 22 अगस्त को हुआ पिछला कार्यक्रम विशेष रूप से छात्राओं की समस्याओं और चुनौतियों पर केंद्रित था। इस पूरी पहल के माध्यम से राहुल गांधी परीक्षा संबंधी अनियमितताओं, पढ़ाई के बढ़ते खर्चों और बुनियादी सुविधाओं के आभाव जैसे गंभीर मुद्दों को लगातार राष्ट्रीय पटल पर ला रहे हैं, ताकि देश के नीति-निर्धारण में युवाओं की आवाज को प्रमुखता मिल सके।