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पृथ्वी जैसे दूसरे ग्रह की तलाश का काम होगा तेज

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी की नई महत्वाकांक्षी परियोजना शीघ्र होगी

काफी समय से अंतरिक्ष में यह काम जारी है

इस बार मिशन को एल 2 पर स्थापित करेंगे

गोल्डिलॉक्स जोन के क्षेत्र पर मुख्य ध्यान

राष्ट्रीय खबर

रांचीः ब्रह्मांड में पृथ्वी जैसे किसी अन्य ग्रह की तलाश मानव सभ्यता के इतिहास की सबसे रोमांचक और जटिल वैज्ञानिक खोजों में से एक है। इसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) ने अपने महत्वाकांक्षी पीएलएटो (प्लैनेटरी ट्रांसिट्स एंड ओसिलेशन ऑफ स्टार्स) उपग्रह मिशन को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस अत्याधुनिक अंतरिक्ष वेधशाला का मुख्य उद्देश्य हमारे सौर मंडल से परे यानी एक्सोप्लेनेट की खोज करना है, जो आकार, बनावट और अपने तारे से दूरी के मामले में हमारी पृथ्वी के बिल्कुल समान हों।

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पीएलएटो मिशन अंतरिक्ष में एक विशिष्ट बिंदु यानी लैग्रेंज प्वाइंट 2 (एल2) पर स्थापित किया जाएगा, जो पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर स्थित है। इस मिशन की सबसे बड़ी खूबी इसमें लगे 26 अलग-अलग कैमरे और टेलीस्कोप हैं, जो एक साथ मिलकर अंतरिक्ष के एक बड़े हिस्से की बारीकी से निगरानी करेंगे। यह अंतरिक्ष दूरबीन मुख्य रूप से तारों के प्रकाश में होने वाले सूक्ष्म उतार-चढ़ाव का अध्ययन करती है। जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है, तो तारे के प्रकाश में मामूली सी कमी आती है, जिसे ट्रांजिट विधि कहा जाता है। पीएलएटो इसी तकनीक का उपयोग करके पृथ्वी जैसे छोटे और पथरीले ग्रहों का पता लगाएगा।

वैज्ञानिकों के लिए इस खोज का सबसे केंद्रीय बिंदु रहने योग्य क्षेत्र की तलाश है, जिसे अक्सर गोल्डिलॉक्स जोन भी कहा जाता है। यह किसी तारे के चारों ओर का वह निश्चित क्षेत्र होता है, जहाँ तापमान न तो अत्यधिक गर्म होता है और न ही बहुत ठंडा। इस आदर्श तापमान की वजह से ही ग्रह की सतह पर तरल रूप में पानी के पाए जाने की संभावना सबसे अधिक होती है, जो जीवन के पनपने के लिए सबसे बुनियादी शर्त है। पीएलएटो न केवल इन नए ग्रहों की खोज करेगा, बल्कि उनके मूल तारों की आयु, द्रव्यमान और आकार का भी सटीक विश्लेषण करेगा, जिससे यह पता चल सके कि वे ग्रह अपने सौर मंडल में कितने स्थिर और अनुकूल हैं।

इस मिशन के सफल होने से खगोल विज्ञान के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ेगा। यदि अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को पृथ्वी के आकार के ऐसे ग्रह मिल जाते हैं जिन पर वायुमंडल और पानी के संकेत मिलते हैं, तो यह इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण होगा कि ब्रह्मांड में हम अकेले नहीं हैं। यह शोध न केवल हमारे सौर मंडल की उत्पत्ति के रहस्यों को सुलझाने में मदद करेगा, बल्कि भविष्य में अंतरिक्ष अन्वेषण और अलौकिक जीवन की खोज की दिशा को पूरी तरह से बदल कर रख देगा।

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