एनआईए ने यूएपीए कानून की धाराएं हटा ली है
चर्चा है अमेरिकी कूटनीति का असर है
मुख्य व्यक्ति पूर्व अमेरिकी सैनिक है
एनआईए की चार्जशीट में यह धारा नहीं
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भारत में एथनिक सशस्त्र समूहों से संबंधों के आरोप में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैन डाइक सहित सात विदेशियों के खिलाफ सख्त आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए की धाराएं हटा ली हैं। सूत्रों के अनुसार, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अन्य भारतीय अधिकारियों के समक्ष यह मुद्दा उठाया था। हालांकि, भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है कि अमेरिकी कूटनीतिक दबाव में यह कदम उठाया गया है।
डाइक को 11 मार्च को कोलकाता हवाई अड्डे से पकड़ा गया था, जबकि छह यूक्रेनी नागरिकों को उसके अगले दिन दिल्ली और लखनऊ हवाई अड्डों से गिरफ्तार किया गया। डाइक के परिवार ने उसकी रिहाई के लिए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से कूटनीतिक हस्तक्षेप की अपील की थी। एनआईए ने मंगलवार को दिल्ली की विशेष अदालत में इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की हल्की धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की, जिसमें केवल अवैध प्रवेश, प्रवास और प्रतिबंधित क्षेत्रों में आवाजाही के आरोप लगाए गए हैं।
विशेष लोक अभियोजक राहुल त्यागी ने अदालत को बताया कि फिलहाल यूएपीए के तहत चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है, लेकिन इस कानून के तहत जांच लंबित रखी गई है। यदि आगे के सबूत मिलते हैं, तो पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।
इससे पहले एनआईए ने आरोप लगाया था कि ये विदेशी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे और यूरोप से लाए गए ड्रोनों के जरिए आतंकवादी साजिश रच रहे थे। एनआईए के अनुसार, इन आरोपियों ने बिना प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट (RAP) के मिजोरम की यात्रा की, अवैध रूप से म्यांमार सीमा पार की और वहां सशस्त्र समूहों से मुलाकात कर ड्रोन की खेप पहुंचाई। एनआईए ने आरोपियों के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच के लिए प्रयोगशाला की मदद ली थी। दूसरी ओर, दिल्ली स्थित यूक्रेनी दूतावास ने इसे रूस की भ्रामक सूचना रणनीति का हिस्सा बताते हुए आरोप लगाया था कि मॉस्को फर्जी खुफिया जानकारी देकर भारत को अपने भू-राजनीतिक एजेंडे में घसीटने का प्रयास कर रहा है।