पूर्व की सहमति के आधार पर अरुणाचल में पहल की गयी
सुबनसिरी के ताक्सिंग में तनाव के बीच बैठक
ले जनरल कालिया इस बैठक में शामिल हुए
वाचा दमाई सीमा पर जुटे दोनों पक्ष के अफसर
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः अरुणाचल के अपर सुबनसिरी जिले के ताक्सिंग क्षेत्र में हाल ही में तनाव की रिपोर्टों के बीच भारत और चीन ने रविवार को अरुणाचल प्रदेश में कोर कमांडर स्तर की वार्ता आयोजित की। नागालैंड में डिमापुर के पास रंगापहाड़ स्थित भारतीय सेना की थ्री कोर (जिसे स्पीयर कोर भी कहा जाता है) के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने अपने चीनी समकक्ष और अन्य अधिकारियों के साथ यह बैठक की। यह वार्ता क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चल रहे मुद्दों को हल करने के लिए भारतीय पक्ष के वाचा-दमाई सीमा बैठक बिंदु पर आयोजित की गई। वाचा भारत का सबसे पूर्वी सीमा कर्मी बैठक बिंदु है, जो अरुणाचल प्रदेश के किबिथू सेक्टर में स्थित है।
मुद्दों के समाधान के लिए हाल के हफ्तों में दोनों पक्षों के स्थानीय कमांडरों के बीच कई बैठकों के बाद कोर कमांडर स्तर की बातचीत की खबर सबसे पहले सामने आई थी। सूत्रों के अनुसार, किसी भी तरह की स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए भारतीय सैनिक इस इलाके में बड़ी संख्या में तैनात हैं।
इस वार्ता की महत्ता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि अरुणाचल प्रदेश में एलएसी पर तनाव के बीच हाल के महीनों में भारत और चीन के बीच यह पहली वरिष्ठ सैन्य कमांडर-स्तरीय वार्ता है। यह बैठक 25 अगस्त को बीजिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई मुलाकात के बाद हुई है, जो सीमा वार्ता के लिए दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि हैं। इसके अलावा, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने की संभावना है।
2020 में पूर्वी लद्दाख में एलएसी के पास सैन्य गतिरोध शुरू होने के बाद भारत और चीन अपने रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए दोनों देशों ने चुशुल-मोल्डो सीमा बैठक बिंदु पर 23 दौर की कोर कमांडर-स्तरीय बैठकें की हैं।
शनिवार को पूर्व रक्षा प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान (सेवानिवृत्त) ने कोर कमांडर स्तर की वार्ता और दो अतिरिक्त सैन्य हॉटलाइन की स्थापना को सकारात्मक घटनाक्रम बताया। उन्होंने कहा कि सीमा का मुद्दा अभी भी अनसुलझा है और अवसंरचना निर्माण तथा बल वृद्धि से तनाव की संभावना बनी रहती है, जिसके लिए निरंतर सतर्कता, स्पष्ट समझौतों और उनके अनुपालन की आवश्यकता है।