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रूस में निर्मित लंबी दूरी के मिसाइलों के लिए फेरबदल होगा

सुखोई विमान में मारक क्षमता बढाया जा रहा है

रूसी मिसाइल का नाम आरवीवी-बीडी है

रक्षा परिषद में प्रस्ताव पेश किया गया

सुखोई वायुसेना का प्रमुख हिस्सा है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः  भारत अपनी वायुसेना के अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेI (एसयू-30एमके1) की हवा से हवा में मार करने वाली क्षमता में बड़े विस्तार पर विचार कर रहा है। इसके तहत भारतीय वायुसेना के इस फाइटर जेट में रूस निर्मित लंबी दूरी की मिसाइल को एकीकृत करने का एक प्रस्ताव रक्षा अधिग्रहण परिषद के समक्ष रखा जाना है।

रक्षा सूत्रों के अनुसार, डीएसी की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए लाए जाने की संभावना है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब रक्षा मंत्रालय सुखोई-30एमकेI बेड़े के व्यापक आधुनिकीकरण पर काम कर रहा है, जिसमें अलग से अपग्रेड और ओवरहालिंग कार्यक्रम भी शामिल हैं।

इस योजना के तहत सुखोई-30एमके1 में ऐसे संशोधन करने होंगे जिससे उसमें आरवीवी-बीडी मिसाइल को लगाया जा सके। यह रूस की लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसे अधिक दूरी पर स्थित हवाई लक्ष्यों को भेदने के लिए डिज़ाइन किया गया है। मिसाइलों के इस वर्ग में ऐसे संस्करण भी शामिल हैं जो एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल प्लेटफॉर्म्स और अन्य निगरानी विमानों जैसे लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम हैं।

प्रस्तावित खरीद का यह कदम ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से ठीक कुछ दिन पहले सामने आया है, जहां नई दिल्ली और मास्को के बीच रक्षा सहयोग प्रमुखता से चर्चा का विषय रहने की उम्मीद है।

वर्तमान में 260 से अधिक सुखोई-30एमके1 विमान भारतीय वायुसेना की सेवा में हैं, जो इस विमान को भारत के लड़ाकू बेड़े का एक मुख्य हिस्सा बनाते हैं। इसके अतिरिक्त, इन फाइटर जेट्स के लिए दो अलग-अलग आधुनिकीकरण परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। इन नियोजित अपग्रेड्स का उद्देश्य अधिक दूरी से लक्ष्यों का पता लगाने और उन पर सटीक हमला करने की क्षमता को बेहतर बनाना है।