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भारत के शराबियों का दिल तोड़ने वाली रिपोर्ट सामने आयी

शराब के नाम पर स्पिरिट पी रहे हैं लोग

सरकारी एजेंसी का जांच के बाद निष्कर्ष

मुंबई हाईकोर्ट को इसकी जानकारी दी गयी

सिर्फ इसमें नकली स्वाद मिलाया जाता रहा है

राष्ट्रीय खबर

मुंबई: क्या ओल्ड मोंक के शौकीनों को सालों से गुमराह किया जा रहा था? भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के अनुसार, लोकप्रिय ओल्ड मोंक उत्पाद वास्तव में अपने मौजूदा रूप में रम नहीं है, बल्कि रम के स्वाद (फ्लेवर) वाली एक स्पिरिट है। एफएसएसएआई ने बॉम्बे हाई कोर्ट को सूचित किया कि इस उत्पाद को इसके वर्तमान रूप में रम के रूप में नहीं बेचा जा सकता है।

प्राधिकरण ने कहा कि यह पेय न्यूट्रल स्पिरिट को रम फ्लेवरिंग के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है, इसलिए इसे रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट के रूप में दर्शाया जाना चाहिए। इस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र में ओल्ड मोंक की बिक्री रोक दी गई है। बिक्री ठप होने के कारण कंपनी को हर दिन लगभग 1 करोड़ रुपये का नुकसान होने की खबर है।

एफएसएसएआई ने इससे पहले ओल्ड मोंक की बोतलों पर इस्तेमाल किए जाने वाले सेवन इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड शब्द पर आपत्ति जताई थी। प्राधिकरण ने यह नया पक्ष ओल्ड मोंक की निर्माता कंपनी मोहन रॉकी स्प्रिंग वाटर द्वारा एफएसएसएआई की आपत्तियों को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान रखा। प्राधिकरण के मुताबिक, इस मिश्रण में मैच्योर्ड रम स्पिरिट की मात्रा पांच प्रतिशत से भी कम है, जिससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं।

एफएसएसएआई ने यह भी रेखांकित किया कि शराब में मिलाए गए फ्लेवर की जानकारी लेबल पर बहुत छोटे अक्षरों में छापी गई है, जिससे ग्राहकों के लिए इसे देखना और पढ़ना मुश्किल हो जाता है। रम, व्हिस्की और अन्य मादक पेय गन्ने के उत्पादों और अनाजों सहित विभिन्न कच्चे माल को फरमेंट करके तैयार किए जाते हैं।

निर्माता कंपनी ने अदालत को बताया कि वह फ्लेवरिंग से जुड़ी जानकारी को बड़े अक्षरों में छापने के लिए तैयार है। कंपनी बोतलों से सेवन इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड वाक्यांश को हटाने पर भी सहमत हो गई है। इस बीच, ओल्ड मोंक के कई प्रशंसकों ने निराशा व्यक्त की है और कहा है कि वे उत्पाद के बारे में खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 11 तारीख को होगी।