सोना निर्यात के नियमों को कड़ा किया गया
लाभ का हिस्सा देश में ही रखेगा वह
कच्चे सोना का प्रसंस्करण देश में
नई रिफाइनरी लगाने का भी एलान
अकराः घाना सरकार ने देश के बहुमूल्य सोने के उद्योग से मिलने वाले आर्थिक लाभ का बड़ा हिस्सा अपने देश में ही बनाए रखने के उद्देश्य से सोने के निर्यात नियमों को कड़ा कर दिया है। नए दिशानिर्देशों के तहत कुछ विशिष्ट सोना निर्यातकों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे कच्चे सोने को विदेश भेजने से पहले स्थानीय स्तर पर घाना में ही रिफाइन (शोधित) करें।
1 सितंबर से लागू इस नियम के तहत घाना गोल्ड बोर्ड ने सेल्फ-फाइनेंसिंग एग्रीगेटर्स द्वारा विदेशों में बिना रिफाइन किए गए डोरे गोल्ड के सीधे निर्यात पर रोक लगा दी है। डोरे एक अर्ध-शोधित सोना होता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बुलियन (शुद्ध सोने की सिल्लियों) में बदलने के लिए आगे के प्रसंस्करण की आवश्यकता होती है। यह सख्त प्रशासनिक कदम घाना गोल्ड बोर्ड अधिनियम, 2025 को लागू करने के लिए उठाया गया है, जो गोल्डबॉड को देश में सोने की खरीद, बिक्री, परख, रिफाइनिंग और निर्यात की देखरेख का पूर्ण अधिकार देता है।
स्थानीय मूल्य संवर्धन का प्रयास लाइसेंस प्राप्त कंपनी यूनाइटेड गोल्ड इंटरनेशनल लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी क्लेमेंट एडम असारे मोरजाह ने इस नीति का स्वागत करते हुए कहा कि यह देश के सबसे मूल्यवान प्राकृतिक संसाधन के प्रबंधन में एक ऐतिहासिक बदलाव है। स्वतंत्रता के बाद पहली बार किसी सरकार ने यह सुनिश्चित करने का दृढ़ संकल्प दिखाया है कि घाना को अपने सोने का वास्तविक लाभ मिले। स्थानीय स्तर पर रिफाइनिंग से घाना की कंपनियां उन लाभांशों को प्राप्त कर सकेंगी जो अब तक विदेशी प्रसंस्करणकर्ताओं के पास चले जाते थे। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अचानक समय सीमा तय किए जाने से पुरानी संविदाओं (कॉन्ट्रैक्ट्स) में संशोधन की चुनौतियाँ सामने आई हैं।
गोल्डबॉड के मीडिया अधिकारी प्रिंस क्वामे मिंका ने बताया कि यह नीति राष्ट्रपति जॉन महामा के 2030 के विजन के अनुरूप है, जिसके तहत प्राकृतिक संसाधनों को बिना मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) के निर्यात नहीं किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर सोने के शोधन से नए रोजगार पैदा होंगे, विदेशी शोधन पर होने वाला खर्च बचेगा और स्थानीय आभूषण निर्माण उद्योगों को बल मिलेगा। इसके अतिरिक्त, घाना का लक्ष्य दुबई के गोल्ड सूक की तर्ज पर एक गोल्ड विलेज विकसित करना भी है।
स्वर्ण क्षेत्र वर्तमान में घाना के पास गोल्ड कोस्ट रिफाइनरी और रॉयल घाना गोल्ड रिफाइनरी सहित चार लाइसेंस प्राप्त रिफाइनरियां हैं। रॉयल घाना रिफाइनरी की दैनिक क्षमता 400 किलोग्राम है, जबकि गोल्ड कोस्ट रिफाइनरी की क्षमता प्रति सप्ताह दो टन तक की है। गोल्डबॉड महाद्वीप की सबसे बड़ी रिफाइनरी बनाने की योजना पर भी काम कर रहा है।