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नीदरलैंड ने अमेरिका से अपना सोना भंडार हटाया

वैश्विक भू राजनीतिक तनावों में अपना घर बचाने की कवायद

लंदनः नीदरलैंड के केंद्रीय बैंक (डच सेंट्रल बैंक) ने वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और भावी संकटों की आशंका के बीच अपनी वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने के उद्देश्य से अमेरिका और कनाडा से लगभग 10 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का अपना स्वर्ण भंडार लंदन स्थानांतरित करने का एक बड़ा फैसला किया है।

डच सेंट्रल बैंक ने स्पष्ट किया कि उसने अपने सोने के भंडार को स्थानांतरित किया है ताकि वह गंभीर संकटों से निपटने के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सके। यद्यपि बैंक ने किसी विशिष्ट भावी संकट का नाम नहीं लिया, लेकिन वर्तमान में अमेरिका द्वारा कनाडा के साथ छेड़े गए व्यापार टैरिफ युद्ध, ईरान में जारी सैन्य संघर्ष और वेनेजुएला व क्यूबा के आसपास अमेरिकी अभियानों के कारण वैश्विक स्तर पर गंभीर अनिश्चितता का माहौल है। इसके अतिरिक्त, चालू वर्ष में शुरू हुए युद्ध में यूरोपीय सहयोगियों की अनिच्छा पर अमेरिकी प्रशासन की नाराजगी के चलते यूरोप और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संबंधों में भी दरार आई है।

डीएनबी के अध्यक्ष ओलाफ स्लीपेन ने बयान में कहा, इस स्थानांतरण के साथ हमने अपने स्वर्ण भंडार की ट्रेडेबिलिटी में सुधार किया है। हम उम्मीद करते हैं कि हमें कभी इसका उपयोग करने की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन हमें अपनी तैयारियों और लचीलेपन को मजबूत करने की आवश्यकता है।

नीदरलैंड्स के पास कुल 612.4 टन सोना है, जिसकी कीमत लगभग 72.2 बिलियन यूरो (करीब 83.8 अरब डॉलर) है। यह भंडार वित्तीय प्रणाली के विफल होने की स्थिति में देश के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा के रूप में कार्य करता है। जोखिम विविधीकरण की रणनीति के तहत नीदरलैंड्स अपने सोने को नीदरलैंड्स स्थित अपने ज़ीस्ट कैश सेंटर, बैंक ऑफ इंग्लैंड (लंदन), फेडरल रिजर्व (न्यूयोर्क) और बैंक ऑफ कनाडा (ओटावा) में विभाजित करके रखता है।

लंदन अब डच सोने का सबसे बड़ा विदेशी भंडारण केंद्र बन गया है। स्थानांतरित किए गए 86 टन सोने का मूल्य लगभग 10.11 बिलियन यूरो (11.73 अरब डॉलर) आंका गया है। इसे दो तरीकों से पूरा किया गया। लगभग 59 टन सोना न्यूयॉर्क में बेचकर तुरंत लंदन में अंतरराष्ट्रीय बाजार मानकों के अनुरूप खरीदा गया। 27 टन से अधिक सोना अमेरिका व कनाडा से भौतिक रूप से ज़ीस्ट लाया गया और उसी मात्रा में ज़ीस्ट से लंदन भेजा गया ताकि सिल्लियों को फिर से पिघलाने की जरूरत न पड़े।

लंदन को भौतिक सोने का दुनिया का सबसे बड़ा और तरल बाजार माना जाता है, जहां संकट के समय सोने को बहुत तेज़ी से नकदी या अन्य संपत्तियों में बदला जा सकता है। नीदरलैंड्स द्वारा अपने सोने का बड़ा हिस्सा अमेरिका से हटाकर लंदन ले जाना अमेरिकी वित्तीय विश्वसनीयता के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यूरोपीय देश अब अमेरिकी नीतियों की अनिश्चितता और भू-राजनीतिक खींचतान के कारण अमेरिकी वाल्टों में अपनी संपत्ति रखने के बजाय सुरक्षित और त्वरित पहुंच वाले बाजारों को प्राथमिकता दे रहे हैं।