चुनाव आयोग के मतदाता पुनरीक्षण के आंकड़े आने लगे हैं
अब यह मुद्दा गंभीर विषय हो गया
महाराष्ट्र का नंबर सबसे ऊपर है
चार नवंबर को होगा अंतिम प्रकाशन
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों में सुधार के लिए चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है। 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी इस प्रक्रिया के दौरान जारी मसौदा मतदाता सूचियों से लगभग 13.37 करोड़ मतदाताओं के नाम बाहर हो गए हैं। यह संख्या इन राज्यों के पुनरीक्षण-पूर्व कुल मतदाताओं का लगभग 14.1 प्रतिशत है।
आयोग के आंकड़ों के अनुसार, यह अभियान तीन चरणों में संचालित किया गया। प्रथम चरण की शुरुआत बिहार से हुई थी, जिसके बाद दूसरे चरण में नौ राज्यों तथा तीन केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया। तीसरे चरण के तहत 16 राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेश कवर किए गए हैं।
नामी सूची से बाहर होने के मामले में राज्यों के बीच बड़ा अंतर देखा गया है। महाराष्ट्र इस सूची में शीर्ष पर है, जहां सर्वाधिक 2.07 करोड़ नाम बाहर किए गए हैं। इसके बाद कर्नाटक में लगभग 1.08 करोड़ और तेलंगाना में 73.39 लाख नाम हटाए गए हैं। दिल्ली में 47.57 लाख तथा आंध्र प्रदेश में 44.90 लाख नाम मसौदा सूची में शामिल नहीं हो सके हैं।
वहीं, प्रतिशत के आधार पर देखें तो देश की राजधानी दिल्ली में सबसे बड़ा बदलाव दर्ज किया गया है, जहां के पूर्ववर्ती मतदाता वर्ग में से 32.8 प्रतिशत नाम बाहर हो चुके हैं। इसके बाद दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव में 29.6 प्रतिशत, तेलंगाना में 21.7 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 21.1 प्रतिशत की कटौती दर्ज की गई है।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े केवल मसौदा मतदाता सूची के हैं और यह अंतिम मतदाता सूची नहीं है। जिन नागरिकों के नाम छूटे हैं, उन्हें अंतिम सूची प्रकाशन से पहले दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का पूरा अवसर प्रदान किया जा रहा है। नाम हटने के मुख्य कारणों में स्थायी रूप से स्थानांतरित होना, अनुपस्थित या अनुपलब्ध होना, मृत्यु होना अथवा एक से अधिक स्थानों पर दोहरी प्रविष्टि होना शामिल है।
सामान्य संशोधन से अलग है विशेष गहन पुनरीक्षण यह प्रक्रिया से अलग है। एसआईआर के अंतर्गत मतदाता सूची को नए सिरे से तैयार किया जाता है, जिसमें प्रत्येक पंजीकृत मतदाता को गणना फॉर्म भरकर निर्धारित मानकों के तहत अपनी पात्रता साबित करनी होती है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में जिन मतदाताओं के नाम मसौदा सूची से गायब हैं, वे 30 सितंबर तक अपने दावे पेश कर सकते हैं। इसके बाद 4 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
नागरिक आयोग के पोर्टल या वोटर हेल्पलाइन ऐप पर अपने ईपीआईसी नंबर के माध्यम से मसौदा सूची में नाम की जांच कर सकते हैं। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची में नहीं है, तो वे दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वा सकते हैं। इसके अलावा, विवरण में सुधार के लिए फॉर्म-8 तथा किसी गलत प्रविष्टि पर आपत्ति या नाम हटवाने के लिए फॉर्म-7 का उपयोग किया जा सकता है। नागरिक सहायता के लिए अपने बीएलओ या ईआरओ से भी संपर्क कर सकते हैं।