कांगपोकपी के टिपोरम गांव में पचास घर में आगजनी
कुकी इनपी ने केंद्र शासित प्रदेश मांगा
नागा नागरिकों की हत्या का मामला गरमाया
पुलिस और एनआईए ने अपनी कार्रवाई तेज की
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटी : जातीय हिंसा की आग में झुलस रहे मणिपुर में हालात एक बार फिर से बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। कांगपोकपी जिले में लगातार दो दिनों तक बड़े पैमाने पर हुई हिंसा और आगजनी में 100 से अधिक घरों को राख कर दिया गया है, जबकि 10 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।
ताजा घटना कांगपोकपी के टिपोरम गांव से सामने आई, जहां असामाजिक तत्वों ने 50 से अधिक घरों को आग के हवाले कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार, इनमें से कुछ घर नेपाली समुदाय के लोगों के भी थे। इससे एक दिन पहले इंफाल-तामेंगलोंग रोड पर भी 50 से ज्यादा घरों में आगजनी की गई थी। यह ताजा हिंसा सोमवार को तेइखांग कुकी गांव पर हुए हमले के बाद भड़की, जिसमें दो महिलाओं समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।
हमले के दौरान भीषण गोलीबारी हुई और कई वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया। घायलों में स्थानीय चर्च के एक पादरी भी शामिल हैं। विस्थापित ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि घटना की सूचना मिलने के बावजूद सुरक्षा बलों ने समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, हालांकि आधिकारिक तौर पर इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
दूसरी ओर, लेइलोन वाइफेई क्षेत्र में छह नागा नागरिकों के अपहरण और उनके शवों को क्षत-विक्षत कर बेरहमी से हत्या किए जाने के सनसनीखेज मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को बड़ी सफलता मिली है। विधानसभा में गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम ने बताया कि इस जघन्य वारदात में शामिल चार संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि चार अन्य फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी है।
इस बढ़ते तनाव के बीच, कुकी इनपी मणिपुर (केआईएम) ने केंद्र सरकार से कुकी-जो समुदाय के लिए विधायिका के साथ केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भेजे ज्ञापन में संगठन ने नागा विधायकों द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए चेतावनी दी कि ऐसी बयानबाजी से राज्य की सुरक्षा स्थिति और बिगड़ सकती है।