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कुकी-जो विधायक अब विधानसभा में पहुंचे

वर्ष 2023 के बाद पहली बार अच्छी चीज देखने को मिली

वर्ष 2023 से वे अनुपस्थित रहे थे

सिर्फ वर्चुअल बैठक में शामिल होते रहे

अविश्वास के माहौल की वजह से ऐसा रहा

उत्तर पूर्व संवाददाता

गुवाहाटीः 3 मई, 2023 को मैतेई-कुकी जातीय संघर्ष की शुरुआत के बाद से पहली बार, कुकी-ज़ो विधायकों ने मणिपुर विधानसभा में व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति दर्ज कराई है। इंफाल में 12वीं मणिपुर विधानसभा के 8वें सत्र की शुरुआत एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के साथ हुई, जब सैतु के विधायक हाओखोलेट किपगेन और सैकुल की विधायक किमनेओ हाओकिप हैंगशिंग कार्यवाही में भौतिक रूप से शामिल हुए।

सदन में उनकी यह भौतिक उपस्थिति लगभग साढ़े तीन साल के लंबे अंतराल के बाद हुई है। जातीय हिंसा भड़कने के बाद से कुकी-ज़ो विधायक विधानसभा की भौतिक बैठकों से दूर रहे थे और फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार के बाद से केवल वर्चुअल माध्यम से जुड़ते रहे थे। विधानसभा में वापसी पर हाओखोलेट किपगेन ने कहा कि वे लंबे समय बाद सदन में वापस आकर बेहद खुश हैं। दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन सत्र में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुईं।

गौरतलब है कि कुकी समुदाय की शीर्ष संस्था कुकी इनपी मणिपुर ने 31 अगस्त को एक सख्त निर्देश जारी कर सभी 10 कुकी-ज़ो विधायकों को 12वीं मणिपुर विधानसभा के आठवें सत्र का पूरी तरह से बहिष्कार करने को कहा था। हालांकि, इस फरमान के बावजूद दो विधायक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए और उपमुख्यमंत्री वर्चुअल रूप से जुड़ीं।

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कुकी-ज़ो विधायकों की भौतिक उपस्थिति का स्वागत करते हुए इसे एक सकारात्मक कदम और मणिपुर में शांति व एकता की दिशा में महत्वपूर्ण विकास बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम समुदायों के बीच विश्वास के अंतर को दूर करने के राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है। उन्होंने राज्य को स्थायी शांति की ओर ले जाने के लिए सामूहिक प्रयासों, समावेशी संवाद और सुलह-सफाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में मूल रूप से 10 कुकी-ज़ो विधायक चुने गए थे, लेकिन भाजपा विधायक वुंगज़ागिन वाल्टे के निधन के बाद अब यह संख्या 9 रह गई है। 3 मई, 2023 को मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में निकाली गई ट्राइबल सॉलिडेरिटी मार्च के बाद भड़की हिंसा ने राज्य को घाटी (मैतेई) और पहाड़ी इलाकों (कुकी-ज़ो) में विभाजित कर दिया था। इस संघर्ष में 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 60,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। ऐसे में विधायकों की सदन में वापसी शांति प्रक्रिया की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।