उड़ीसा के भाजपा मंत्री के बयान के बाद नया विवाद उभरा
ओबीसी आरक्षण पर मचा है घमासान
उप वर्गीकरण को लेकर उभरा मतभेद
क्रीमी लेयर सिर्फ ओबीसी पर लागू क्यों
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः केंद्र की एनडीए सरकार में दो केंद्रीय मंत्रियों के बीच तीखी राजनीतिक तकरार का दुर्लभ मामला सामने आया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख व केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी तथा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बीच अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में उप-वर्गीकरण और क्रीमी लेयर को लेकर जुबानी जंग छिड़ गई है। विवाद के बढ़ते ही दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से मंत्री पद से इस्तीफे की मांग कर डाली है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब जीतन राम मांझी के पुत्र और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण नीति की समीक्षा की वकालत की। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ दलितों की कुछ ही जातियों—जैसे पासवान और रविदास—तक सीमित रह गया है, जबकि मुसहर जैसी अत्यंत पिछड़ी और वंचित जातियां अब भी प्रतिनिधित्व से महरूम हैं। सुमन ने सवाल उठाया कि बिहार में 4 प्रतिशत आबादी वाले मुसहर समुदाय से कोई डीएम या एसपी क्यों नहीं बन सका। उन्होंने उप-कोटे की वकालत करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य आरक्षण खत्म करना नहीं, बल्कि इसे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।
इस मांग पर कड़ा रुख अपनाते हुए चिराग पासवान ने कहा कि एससी आरक्षण का संवैधानिक आधार आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक भेदभाव और छुआछूत है। इसे आर्थिक आधार या क्रीमी लेयर से जोड़ना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। चिराग ने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग क्रीमी लेयर की वकालत कर रहे हैं, उन्हें खुद आरक्षण के लाभ छोड़ देने चाहिए। उन्होंने मांग की कि यदि जीतन राम मांझी और उनके बेटे इस विचार का समर्थन करते हैं, तो उन्हें सबसे पहले अपने-अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए।
इसके जवाब में पलटवार करते हुए जीतन राम मांझी ने चिराग पासवान पर गरीबों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। मांझी ने कहा कि यदि वंचितों को उनका हक दिलाने का विरोध किया जा रहा है, तो चिराग पासवान को स्वयं अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
यह पूरा विवाद वर्ष 2024 के सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले की पृष्ठभूमि में उपजा है, जिसमें राज्यों को एससी/एसटी के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति दी गई थी। हालांकि, केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में हलफनामा दायर कर स्पष्ट किया है कि क्रीमी लेयर का सिद्धांत केवल अन्य पिछड़ा वर्ग पर लागू होता है, इसे एससी/एसटी पर लागू नहीं किया जा सकता।