विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की तबाही के आंकड़े बढ़े
काठमांडूः नेपाल-चीन सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 676 तक पहुंच गई है, जबकि खराब मौसम के चलते राहत और बचाव कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। दोनों देशों के अधिकारियों द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस भयावह प्राकृतिक आपदा के बाद से लगभग 3,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी अधिकारियों ने अपने क्षेत्र में सात लोगों की मौत और 550 से अधिक लोगों के लापता होने की पुष्टि की है। वहीं दूसरी ओर, नेपाल की राष्ट्रीय आपदा एजेंसी ने जानकारी दी है कि उनके देश में मृतकों की संख्या बढ़कर 669 हो गई है और 2,426 लोग अभी भी लापता हैं। शनिवार को नेपाली अधिकारियों द्वारा आंकड़ों को अद्यतन किए जाने के बाद दोनों क्षेत्रों को मिलाकर कुल मौतों की संख्या 676 तक पहुंच गई।
विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का मानना है कि बुधवार को नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में आई इस अचानक बाढ़ और भूस्खलन की मुख्य वजह एक बड़े ग्लेशियर से बर्फ का एक विशाल टुकड़ा टूटकर गिरना था। ग्लेशियर का यह हिस्सा नीचे बहने वाली ल्हेंदे खोला नदी में गिर गया, जिससे नदी का जलस्तर अचानक अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया और देखते ही देखते निचले इलाकों में भारी तबाही मच गई। उसके बाद चीन द्वारा दी गयी पूर्व चेतावनी की वजह से एक खतरा और टल गया जबकि एक ऐसा ही झील फिर से टूटा लेकिन तब तक लोगों को सुरक्षित इलाकों में हटाया जा चुका था।
मौसम की खराबी और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के कारण राहत कर्मियों को मलबे तक पहुँचने और खोज अभियान चलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लापता लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में हताहतों का आंकड़ा और बढ़ सकता है। नेपाल से बहकर भारत तक पहुंचने वाली नदियों में भी लाशों के मिलने का सिलसिला जारी है। ऐसे शवों की पहचान के प्रयास किये जा रहे हैं। कई नदियों से होते हुए यह लाशें भारतीय सीमा के अंदर पहुंची है।