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लाठीचार्ज गलत, बात चीत करे झारखंड सरकारः राहुल गांधी

झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन पर लाठीचार्ज पर नेता प्रतिपक्ष का बयान

छात्र लोकतांत्रिक ढंग से प्रदर्शन कर रहे हैं

छात्रों से अहंकार दिखाना गलत कार्य है

समाधान तो बात चीत से ही निकल पायेगा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः झारखंड की राजधानी रांची में हाल ही में हुए छात्र आंदोलन और उस पर पुलिस द्वारा की गई सख्त कार्रवाई को लेकर सियासत गरमा गई है। राज्य में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार शाम इस घटनाक्रम पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के खिलाफ पुलिस द्वारा बल का प्रयोग किया जाना पूरी तरह से अनुचित और गलत है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात साझा करते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि देश के हर नागरिक और छात्र को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने और विरोध प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी तरह के मतभेद या विवाद का समाधान लाठी-डंडों से नहीं, बल्कि केवल आपसी संवाद और बातचीत के माध्यम से ही निकाला जा सकता है। अपनी पार्टी की साझीदारी वाली झारखंड सरकार को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन को अहंकार या सख्ती दिखाने के बजाय छात्रों की बातों को पूरी गंभीरता से सुनना चाहिए और उनकी जायज समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य छात्र-हित से जुड़ी मांगों को लेकर हजारों की संख्या में छात्र और अभ्यर्थी आक्रोशित होकर सड़कों पर उतर आए। एक बड़ा जुलूस निकालते हुए ये प्रदर्शनकारी सोमवार शाम करीब छह बजे झारखंड विधानसभा भवन के मुख्य परिसर के बेहद करीब पहुंच गए।

अचानक हुए इस भारी जमावड़े को नियंत्रित करने और विधानसभा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैनात पुलिस एवं सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इस दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के कई गोले छोड़े। हालांकि, इतनी भारी पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद अपनी मांगों को लेकर अड़े छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हुए और वे लगातार सरकार विरोधी नारेबाजी करते रहे, जिससे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया।